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Category: Self-Improvement
Tags: beliefsmanifestationmeditationmindsetwellness
Entities: Aditya Birla GroupAnurag RishiForbesJoe DispenzaLouise HayNicoleta TeslaNorman CousinsPaul McKennaTata Motors
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मान लो पैसा मेरे पास टिकता नहीं है। तो इसमें मेरे पास दो इमोशंस की बहुत भारी कमी है। अपना 2026 में हेल्थ एंड वेल्थ के ऊपर काम करना चाहता है। इंक्रीस करना चाहता है, बेटर करना चाहता है, मल्टीप्लाई करना चाहता है। वो कैसे इसको मैनिफेस्ट कर सकता
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है? लर्निंग इज नॉट दैटेंट। अनलर्न करना उससे ज्यादाेंट है जो हमने गलत सीखा हुआ है। निकोला टेस्ला ने एक बहुत खूबसूरत बात बोली यहां से मैंने इसको डिकोड करना शुरू किया कि इफ यू वांट टू फाइंड आउट द
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सीक्रेट्स ऑफ दिस यूनिवर्स थिंक इन टर्म्स ऑफ वो अपनी जवानी बेच देते हैं बुढ़ापा खरीदने के लिए। आप मेडिटेशन में बैठ के देखो जितने विचार जीवन में कभी नहीं आए सारे आज आ जाएंगे। बनते कैसे हैं ये बिलीफ? डॉक्टर पॉल मैकेना कहते हैं कि बिलीफ मेनली दो ही चीजों से बनते हैं। और
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पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम अगर किसी इंसान का ट्रिगर हो जाए आप कितनी स्टडीज उठा के देख लो कि वो जिंदगी में कभी डिप्रेशन में नहीं जा सकता। कनेक्टिंग बैक टू द फर्स्ट स्टेटमेंट आई कोटेड शंकर भगवान की कि उसे
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सदा ही डर रहता है जो ऊंचा चढ़ जाएगा। जो बैठा है धरती पे उसे नीचे कौन गिरेगा। हर नए साल की तरह इस साल भी आप में से कई लोगों ने अपनी लाइफ के तीन मेन पिलर्स हेल्थ, वेल्थ और रिलेशनशिप्स के लिए नए रेजोलशंस, नए गोल्स बनाए हुए हैं। पर
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फोब्स की रिसर्च पता है क्या कहती है? फोब्स की एक रिसर्च के अकॉर्डिंग सिर्फ अगले तीन महीनों के अंदर ही मैक्सिमम लोग अपने न्यू ईयर गोल्स पर गिव अप कर देते हैं। पर इस गिव अप करने का कारण लो एंबिशन या आपका अनलकी होना नहीं है। बल्कि आपकी माइंड की वो सीक्रेट पावर है जिससे
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मैक्सिमम लोगों ने कभी अनलॉक नहीं किया। और इसी माइंड टेक्निक को अनलॉक करने के लिए आज हमारे साथ जुड़े हैं हेल्थ वेलनेस एंड माइंड ट्रांसफॉर्मेशन कोच अनुराग ऋषि। जिन्होंने पिछले 11 सालों में अपने फ्रेमवक्स की मदद से कई लोगों की लाइफ ट्रांसफॉर्म करी है। उनको हील किया है। आज
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का यह पॉडकास्ट 2530 बुक्स पढ़ने के बराबर है। इस एक पॉडकास्ट में हमने उनसे जाना कि कैसे कोई अपने माइंड को प्रेजेंट मोमेंट में रख सकता है। अपने अंदर पास्ट के जो दबे हुए इमोशंस हैं उनको कैसे पहचान सकता है और रिलीज कर सकता है। खुद को लेकर जो
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पैसे के या हेल्थ के बिलीफ्स बने हुए हैं उनको समझना और उनको बदला कैसे जाता है? क्या है वो मैनिफेस्टेशन फ्रेमवर्क जो 2026 में आपको अपने गोल्स को अचीव करने में हेल्प करेगा?
क्यों लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन कुछ लोगों के लिए काम ही नहीं करता? और
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क्या है मेंटल मूवी टेक्निक जिससे आप अपने बेटर वर्जन को विजुअलाइज करके रियलिटी में बदल सकते हो। इसी पॉडकास्ट में हमने स्ट्रेस को रिलीज करने की, इमोशंस को मैनेज करने की लाइव एक्सरसाइजज़ करी और कई ब्रेन हैक्स अनुराग ने शेयर करे। आई वुड
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से कि ये सिर्फ एक पॉडकास्ट नहीं है। एक लाइफ चेंजिंग कोर्स है। तो अपनी डायरी या नोटपैड रेडी रखो क्योंकि इस पॉडकास्ट में बताए हर एक पॉइंट से आप अपने 2026 को ब्रेव, बैलेंस और ब्रिलियंट बना सकते हो।
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मैं ना एक चीज अक्सर पूछता हूं तो मैं उसी से शुरू करता हूं। सो आई ऑलवेज इट्स वेरी जेन्युइन एंड पर्सनल क्यूरियोसिटी के अगर कोई कुछ करता है तो क्यों करता है? सो व्हाई यू डू व्हाट यू डू?
तो दैट्स माय फर्स्ट क्वेश्चन के आप जो कर रहे हो वो क्यों कर रहे हो? इसके पीछे
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आपका वाई क्या है? क्यों आपने ये शुरू किया?
क्या कारण है? व्हाट ट्रिगरर्ड यू?
और व्हाट इंस्पायर्स यू? इट्स अ लॉन्ग स्टोरी पर मैं कोशिश करता हूं कि मैं उसको थोड़ा कम में समराइज कर सकूं। अ मैं जब इस इंडस्ट्री में आया तो एज अ मोटिवेशनल स्पीकर एज अ सेल्स ट्रेनर
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मेरा सेल्स मेरा फोर्टे रहा हमेशा से और मेरा जॉन भी यही था कि मैं की नोट्स स्पीचेस सभी सेल्स के अराउंड होती थी। तो मैंने कॉर्पोरेट में बहुत काम किया। एक लाइफ में ऐसा टाइम आता है हम सबके साथ आता है कि जब लाइफ में लाइफ आपको बुरी तरह से पटक देती है। यू नो धाराशाही कर देती है। तो ऐसा एक
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लाइफ में मोमेंट मेरे पास भी आया और अगर मैं उसको डिटेल में जाऊंगा तो एक मतलब लंबी कहानी शुरू हो जाएगी। लेकिन मैं यूं बताऊं कि ऐसे लगा कि जैसे जिंदगी से सब कुछ खत्म हो गया हो। हर एक आस्पेक्ट में रिलेशनशिप वाइज, फाइनेंशियल आस्पेक्ट, सोशल आस्पेक्ट सब
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चीजों में बिल्कुल मतलब हर चीज कमर टूट जाना जिसको कहते हैं वैसा हो गया। एक दोस्त ने मुझे रिकमेंड किया कि आपको एक बुक पढ़नी चाहिए। बुक का नाम था एनाटॉमी ऑफ़ एन इलनेस। वो लिखी थी नॉर्मन कजन ने। हम एक ऐसा व्यक्ति जिसको एक लाइफ थ्रेटनिंग डिजीज हो गई। उसको 26-26 पेन किलर्स लेनी
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पड़ती थी दिन में। उसके बाद भी उसकी बॉडी से पेन जाता नहीं था। और डॉक्टर ने बोला था कि 6 महीने का टाइम तुम्हारे पास है। मैंने वो बुक पढ़नी शुरू की। एनाटॉमी ऑफ़ इलनेस। एनाटमी ऑफ़ एन इलनेस। नॉमन कजन। उस बुक में एक जगह पे एक रेफरेंस आता है। तो वो नॉमन कजन डॉक्टर से पूछता है कि ये
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इलनेस मुझे क्यों हुई? मैंने कोई टोबैको, सिगरेट, शराब मैंने कभी जिंदगी में कुछ हाथ नहीं लगाया। डॉक्टर ने बोला क्या तुम्हारे पास यहां कुछ बर्डन रखा हुआ है?
हां। डायरेक्टली कनेक्ट कर जाता है। कहता है हां हां बचपन में जाता है। कहता है यार यह तो बहुत पुराना रखा हुआ है। मैं तो
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इसके बारे में सोचता भी नहीं हूं। डॉक्टर ने कहा दिस इज व्हाट एक्सैक्टली द थिंग इज जो आपके माइंड में सब कुछ क्रिएट कर रही है और इसकी वजह से आपको यह डिजीज हुई है। तो उसका नेक्स्ट क्वेश्चन था कि अगर यह नेगेटिव थॉट्स या यह बर्डन या ये चाइल्डहुड ट्रॉमा मुझे बीमारी दे सकता है तो क्या हैप्पीनेस मुझे ठीक भी कर सकती
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है? डॉक्टर वास स्केप्टिकल। उसने कहा आई डोंट एक्सक्टली नो अबाउट इट। लेकिन उसने कहा मुझे पता चल गया कि यह कर सकती है। उसने एक दोस्त को साथ लिया। जिंदगी में दोस्त जो आपके आपके साथ काम कर देते हैं। मुझे लगता है इंसानियत ने मानवता ने आज जो सबसे बड़ी चीज खोदी है वो
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दोस्ती खो दी है। हम उसने अपने एक दोस्त को लिया। उस जमाने में वीसीआर होते थे। आप तो जब आपकी शुरू की वीडियोस देखी तो अब आप तो सबसे ज्यादा रिलेट कर पाएंगे वीसीआर से। कैसेट्स डलती थी उसमें। तो उसने लोरल एंड हार्डी और चार्ली चैपलिन
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की टेप्स अरेंज की। हां हां। वो टेप्स अरेंज करके उसने उनको प्ले करना शुरू किया कि अगर नेगेटिव थॉट बीमार कर सकता है और मैं खुश रहूंगा तो मैं शायद ठीक हो जाऊं। साथ में उसने विटामिन सी एजोबिक एसिड जो था उसका अरेंजमेंट किया। वो बोलता कि अगर मैं 10 मेडिसिन भी लेता तो मुझे 20 मिनट्स की
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स्लीप आती। उसमें भी मुझे पेन होता रहता। लेकिन अगर मैं 20 मिनट्स का बेली लाफ्टर करता। इंटेंस बेली लाफ्टर तो मैं 2 घंटे पेनलेस स्लीप लेता। बिना दर्द के मतलब जैसे मैं ट्रांस में मतलब एनस्थसिया दे दिया गया हो, एले लगा दिया गया हो। उसको समझ में आया कि यह मेरी बॉडी
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में चेंजेस लेकर के आ रहा है और कुछ ही टाइम में जब वह वापस आया उसने देखा कि उसकी सारी जो बॉडी से जो भी डिजीज थी वह जा चुकी थी। तो जब मैंने ये बुक पढ़ी तो मैंने कहा यार एक इंसान कर सकता है। फिर मेरे दिमाग में एक नेगेटिव थॉट भी आया हर जगह पे आता है। हम मैंने कहा यार ये तो हो सकता है
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मार्केटिंग गेमिक हो। बेचने के लिए कई बार किताब लिख दी जाती है। मैंने Google किया भैया। अरे यार जो मुझे वहां से रेफरेंसेस मिले यू कैन हील योर लाइफ बाय लुईस हे। हम कैली टर्नर की बुक मिली रेडिकल रेमिशन प्लेसीबो बाय डॉक्टर जो डिस्पेंजा बिकमिंग
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सुपर नेचुरल मतलब इतनी बुक्स थी और मुझे इतने रेफरेंसेस मिले जहां से मुझे यह समझ में आया कि यू कैन हील एनीथिंग नॉट जस्ट योर फिजिकल बॉडी एनी आस्पेक्ट योर लाइफ रिलेशनशिप्स फाइनेंस सोशल लाइफ एनीथिंग
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एंड शायद वही आपका एक रीजन बन जाता है कि आपको समझ आ गया कि यार ये ब्रह्मास्त्र है मैं कॉर्पोरेट में जो कर रहा हूं इट इज वैल्यूुएबल इट इजेंट बट यह रूट ठीक कर दिया तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। नहीं उसके पीछे एक कारण था ना कि अगर मैं मान लो मैं अच्छी कंपनीज़ के साथ ट्रेनिंग
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कर रहा हूं। मैं Tata Motors के साथ काम कर रहा हूं। मैं आदित्य बिरला ग्रुप के साथ काम कर रहा हूं। मुझे ट्रेनिंग का पैसा भी ठीक-ठाक मिल रहा है। लेकिन एट द एंड ऑफ द डे जब आप कंक्लूजन निकालते हो तो आपको पता चलता है कि सुख एक्चुअल में ये है ही नहीं। मतलब जब आपके पास आपकी हेल्थ ठीक है ना तो आपके पास 100
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ड्रीम्स हैं। हम अगर आपकी हेल्थ खराब है ना आपके पास एक ही ड्रीम है। राइट? हम जिस बचपन को मतलब आज हम ढूंढते हैं जब हम बच्चे होते हैं ना हम उससे बोर हो जाते हैं। हमारा जल्दी से मन करता है कि यार मतलब हम पापा का रेजर उठा के भी लगाएंगे। हम सारे वो काम करेंगे। लड़कियों को देखो
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मम्मी की साड़ी पहन उनको होता है जल्दी से बड़ा हो क्योंकि बड़ा होने में लगता है बड़ा ल्यूक्रेटिव है। मतलब बड़ा आनंद है। जैसे ही हम बड़े हो जाते हैं हमारा फिर से मन करता है कि बच्चा होया जाए। हम फिर से वापस होता है ऐसा। क्योंकि उस समय पर हमें यह बोध नहीं होता। हम कभी भी अपनी लाइफ को प्रेजेंट में रह
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के जी नहीं रहे होते। हम या तो पास्ट को पकड़ के रखते हैं या फ्यूचर को अच्छा देख के उसकी तरफ भागते रहते हैं। जब हम यंग एज में भी आ जाते हैं तो हमें लगता है वो पास्ट सही था। या कल को मैं अल्ट्रा सक्सेसफुल अल्ट्रा रिच या मैं बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा। हम फ्यूचर की तरफ देख रहे होते हैं। तो जो आज
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है मतलब मैं बोलना नहीं चाहता लेकिन रंग दे बसंती में बड़ा खूबसूरत आमिर खान डायलॉग बोलते हैं कि पास्ट उधर है, फ्यूचर इधर है और हम जो है हमारे पास हम उसको चैरिश नहीं कर रहे हैं। बचपन में लगता है कि कल को ये हो जाए। जवानी में लगता है पास्ट ठीक था। फ्यूचर ये हो जाए हमेशा पास्ट और फ्यूचर
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हमें पुल करते रहते हैं। लेकिन एक दिन समझ में आता है कि इंसान मैं अक्सर ये बात बोलता हूं कि लोग अपनी जवानी बेच देते हैं बुढ़ापा खरीदने के लिए। क्या बात है। एंड ऑफ द डे हर एक इंसान यही सोच रहा है कि मैं भाग के कैसे मतलब हम लोगों को देख रहे हैं वो सक्सेसफुल वो पैसा वो ये जब हम
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वहां पहुंचते हैं ना तब हमें पता चलता है कि हमने जितना पैसा कमाया मतलब इसका मतलब यह नहीं है मैं पैसा को गलत आई लव मनी लाइक एनीथिंग। मेरे से बड़ा पैसे से मोहब्बत करने वाला व्यक्ति नहीं आपको मिलेगा। लेकिन उसके साथ सुख को भोगना, सुख को जीना वो तब होगा जब हम प्रेजेंट मोमेंट
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में रहेंगे। हम एक चीज की बात कई बार कर रहे हैं प्रेजेंट में रहने की। और कहीं ना कहीं सुना है सबने कि प्रेजेंट में रहना चाहिए। पास्ट एक बीती हुई चीज है। सच नहीं है। फ्यूचर एक इमेजिनेशन है। सच नहीं है। सच सिर्फ प्रेजेंट है। प्रेजेंट इज द ओनली प्रेजेंट वी हैव। हाउ? और मैं इसमें
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बोलूंगा कि ये अगर कोई थ्री स्टेप फ्रेमवर्क अपना ले जिसमें सबसे पहला तो है अवेयरनेस कि वो अवेयरनेस सबसे पहले ये आना भी बहुत जरूरी है कि मैं इस चीज के लिए अवेयर हूं कि मुझे प्रेजेंट मोमेंट में आना है। दूसरा डिस्कनेक्शन लेट गो कि आप जब तक
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क्योंकि आज इंफॉर्मेशन इतनी ज्यादा है। हम इतने ज्यादा ओवरलोड हो रखे हैं इंफॉर्मेशन से कि वो इंफॉर्मेशन हमें उस प्रेजेंट में आने ही नहीं देती। वो चाहती है कि तुम मुझे और पाओ, तुम मुझे और पाओ, तुम मुझे और पाओ। तो दूसरा आप डिस्कनेक्ट हो जाओ। तो आप वो जो चीजें डिस्ट्रैक्शन दे रही हैं उनको कुछ टाइम के लिए अपने से दूर
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करो। उसमें सबसे बड़ी चीज क्या है? मोबाइल मुझे पता है सब लोग बीबी बोलने वाले थे लेकिन मोबाइल मजाक कर रहा हूं। वो मोबाइल को आप कुछ समय के लिए तो अगर आप अवेयर हों और दूसरा
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स्टेप कि आप वो उससे थोड़ी देर के लिए दूरी बना लें। डिटचमेंट थोड़ी देर के लिए और फिर आप एक काम करें। मतलब मैं यह बिगिनर लेवल के लिए बता रहा हूं कि एक काम करना है वो यह करना है कि आपने अपनी आती जाती सांसों पर ध्यान देना है।
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हम सांस को गहरा करना है। डायफ्रेग्मैटिक ब्रीथिंग करनी है। लंबा करना है और सिर्फ अपनी ब्रेथ को देखना है कि ये सांस आई, यह सांस गई, यह सांस आई। पहले दिन मौत लगेगी यह करने में। क्योंकि मन की मृत्यु हो रही है यहां पे। और मन मन आपको छोड़ना किसी को
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नहीं छोड़ना चाहता। आप मेडिटेशन में बैठ के देखो जितने विचार जीवन में कभी नहीं आए सारे आज आ जाएंगे। कहेंगे कहां जा रहा है? हमें भी सोच क्योंकि उसको पता है कि मन की मृत्यु है अगर यह ध्यान में चला गया तो। जितनी खुजली कभी नहीं हुई मेडिटेशन में बैठो। यहां पे
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यहां पे वो मक्खी मच्छर पता नहीं कोई आवाज लगाएगा, कोई बेल बजाएगा, कोई फोन की सारी दुनिया की डिस्ट्रैक्शन आ जाएंगे। एक बार ध्यान में बैठ के देखो। क्यों? क्यों?
क्योंकि मन की मृत्यु है। दूसरी चीज आप उन चीजों को दूर करें जो आपको डिस्ट्रैक्ट कर सकती है। तीसरी चीज सिर्फ अपनी सांसों पर ध्यान लगाएं आती
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जाती। दिन में 5 मिनट का ये रिचुअल ये तीन चीजों को अगर हम करें अवेयरनेस हो जाए। चीजों से डिस्कनेक्ट स्पेशली मोबाइल से कोई हमको डिस्टर्ब करने वाला ना हो और अपनी सांस पर ध्यान लगाएं। हम आप देखोगे कि आपने यह 5 मिनट जो प्रैक्टिस किया ना जैसे एक मैराथन रनर होता है जैसे
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हमारी जो नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट है वो 60 से 80 के बीच में रहती है। मैराथन रनर की 40 तक चली जाती है। हम जैसे एक जो कार्डियाक मतलब जो कार्डियाक एक्टिविटीज ज्यादा करता है उसकी बॉडी में एंड्यूरेंस ज्यादा बढ़ जाती है। वैसे ही जब हम ये 5 मिनट के लिए ये साइलेंस
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प्रैक्टिस करते हैं अपने साथ बैठने का सिर्फ सांसों को देखने का तो जो बाकी के 23 घंटे और 55 मिनट हैं ये वहां की जो रेस्टिंग हार्ट रेट है ये वहां का जो एजिटेशन है ये उसको स्लो डाउन कर काम कर देता है रिलैक्स कर देता है आपके डिसीजंस
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अब गहरे तलों से आएंगे माइंड के अक्सर आपने देखा है मैंने लोगों को सुना है जेलों में बंद लोगों को सुना है वह बोल रहे हैं कि अगर 5 मिनट रुक जाते तो जेल में ना सिर्फ 5 मिनट डिसीजन पोस्टपोन कर लेते जेल में ना होते क्योंकि वह डिसीजन होश में
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नहीं लिया गया बेहोशी में लिया गया अगर हम ये 5 मिनट अपनी ब्रेथ को देखने का एक छोटा सा रिचुअल बनाएं आप होश पूर्ण होने लगे माइंडफुलनेस बढ़ने लगेगा और इसके साथ जब आप थोड़े एडवांस लेवल पर जाएं तो एक काम करो श्रोतापन जो कर रहे हो वो हो जाओ
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ये मेरी लाइफ के लिए सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेटिव चीज थी जब मैंने पहली बार ये आचार्य रजनीश से सुना था। हम् उनके जीवन की बहुत सी चीजें मेरे जीवन में बहुत प्रभाव डालती हैं और आज उनकी बहुत सी प्रैक्टिससेस मैं लोगों तक पहुंचाता हूं। तो उनसे यह पहली बार सुना था कि जो कर रहे हो वो हो जाओ।
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हम इससे बड़ा ध्यान दुनिया में नहीं बना है। और जो व्यक्ति प्रेजेंट में आ गया वो सिर्फ शुक्र अदा करता है जी। क्योंकि कंप्लेंट कब है? पास्ट की है। डिप्रेशन एंग्जायटी किसकी है?
चिंता डर किसका है? फ्यूचर का है। जो व्यक्ति
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प्रेजेंट में आ गया उसके पास ना डर है ना उसके पास चिंता है। उसके पास सिर्फ स्वीकार है और सिर्फ आभार है। तो मुझे लगता है यह छोटा सा रिचुअल कोई अपनाए तो यह लाइफ का सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेटिव टूल होता है। 2026 में कोई चाहता है कि अपनी हेल्थ और बढ़िया और इंप्रूव करे। खराब है
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तो ठीक करे। वेल्थ इंक्रीस कर पाए, मल्टीप्लाई कर पाए। इन शॉर्ट लाइफ में ग्रो कर पाए। उसको अगर यह मैनिफेस्ट करना है तो क्या हम उसको एक एग्जांपल ले लेते हैं। एक लड़का है 22 साल का उसका नाम है यश और यश अपना 2026 में हेल्थ एंड वेल्थ
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के ऊपर काम करना चाहता है। इंक्रीस करना चाहता है, बेटर करना चाहता है, मल्टीप्लाई करना चाहता है। वो कैसे इसको मैनिफेस्ट कर सकता है? मैं यहां पर एक आपको एब्रवेशन मैं भी एक देना चाहूंगा। हां। जैसे हम लोग मीम बनाते हैं। मीम हम
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तो मैं कहता हूं कि मीम बनाओ। हम यह मीम क्या है? एम से माइंड ई से इमोशंस अगेन एम से मेडिटेशंस और लास्ट ई से एनर्जी वै नाइस तो मैं कहता हूं ये मीम बनाओ सबसे पहले माइंड इमोशन
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इमोशंस मेडिटेशन एंड एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन तो इसको मैं थोड़ा सा डिटेल में एक्सप्लेन करना चाहूंगा। सबसे पहले माइंड यानी मेरे मेंटल स्टेट में बहुत सारे ऐसे बिलीफ्स रखे हुए हैं जो मुझे गवर्न करते हैं। हम
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हेल्थ को लेकर के भी, वेल्थ को लेकर के भी। जैसे हेल्थ को लेकर के एक यह बिलीफ है कि यह तो मतलब डिके होगी ही। एक जैसे व्यक्ति मेरे पास आए वह बोले कि सर 60 का हो गया हूं। अब तो हार्ट अटैक आएगा ही। क्यों आएगा भाई? क्यों गीता में लिखा कहां लिखा है ये कि
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आएगा ही। मैंने कहा लोग 100-100 साल की दो-दो साल की उम्र में भी बढ़िया जीते हैं। आप ओकिनावा जाओ आप देखो कि सटेनेरियंस क्या बढ़िया ये बिलीफ्स हैं हमारे। ऐसे ही हमने वेल्थ को लेके बिलीफ बना रखे हैं। तो पहले हमको मॉनिटर करने की जरूरत है अपने माइंड में जाकर के कि मेरे
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लिमिटिंग बिलीफ्स क्या हैं? मेरा लिमिटिंग बिलीफ हो सकता है कि यार मैं अनलकी हूं इसलिए मैं पैसा नहीं कमा पाता हूं। दूसरे लोग बड़े लकी हैं। मेरा लिमिटिंग बिलीफ हो सकता है कि भगवान मेरे से ही नाराज है। ये भी बिलीव आधी से ज्यादा दुनिया भगवान
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से परेशान है। कि भगवान मेरे साथ गलत करता है। मतलब जैसे तुम भगवान की सौतेली हो। मतलब भगवान तुम्हारे साथ गलत। अगर वो गलत कर रहा है तो वो भगवान नहीं है। वो तुम्हारे साथ कोई पार्सअलिटी नहीं कर रहा है कि तुम नारियल चढ़ा गए, तुम कैंडल लगा गए तो तुम्हारा बढ़िया हो गया। जिसने
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नहीं लगाई उसको ठोको। ऐसा ये ऐसा भगवान की कल्पना कर सकते हैं क्या हम? ये भगवान नहीं हो सकते। भगवान पार्शियलिटी नहीं कर रहे हैं। भगवान बोल रहे हैं कि जो तुम बिलीव्स, जो तुम्हारा सबकॉन्शियस, जो तुम्हारा एनर्जेटिक पैटर्न, जो तुम्हारा बॉडी का जो ओरा है, जो यह क्रिएट कर रहा
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है, वही एक्चुअल में लाइफ में तुमको मिल रहा है। तो सबसे पहले उन बिलीव्स को जाके चेक करना पड़ेगा। और ज्यादातर बिलीफ्स बचपन में बने होते हैं कि तुम ज्यादा पैसे नहीं कमा सकते। पैसा दो नंबर के लोग कमाते हैं। दो नंबर से ही पैसा आ सकता है। एक नंबर से तो आ ही नहीं सकता। पैसे के लिए बड़ा मुश्किल ये गलत
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काम करने पड़ते हैं भाई। ये तो और पैसे वाले का तो जीवन नर्क है। पैसे के बाद खुशी कहां है? असली खुशी तो बिना पैसे के है। मतलब हमने यह समझा है कि विलेन बनाया पैसे वाले को कि पैसे के पास खुशी तो ये बिलीव्स कहीं रखे तो नहीं हुए कि मैं अनलकी हूं। पैसा मेरे पास आता नहीं। मुझे
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लॉस ही लॉस होता है। पहले माइंड में जाकर इन बिलीव्स को चेक करना पड़ेगा। उसके बाद हमें ढूंढना पड़ेगा कि इनसे रिलेटेड कॉरेस्पोंडेंट इमोशन क्या है। हम कभी भी थॉट के ऊपर काम नहीं करते। पहली स्टेट में हमने थॉट को आईडेंटिफाई किया। दूसरी स्टेट में हमने इमोशन को पकड़ा। पर
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इमोशन पकड़ने से पहले मैं वापस माइंड पर ही आता हूं। कैसे हैं यह बिलीव्स? कैसे बन रहे हैं इसके?
मतलब हाउ टू आइडेंटिफाई कि यह बिलीफ मेरा बना है। इसके पीछे कारण क्या हो सकता है? डॉक्टर पॉल में कहना कहते हैं कि बिलीफ मेनली दो ही चीजों से बनते हैं। एक जो स्ट्राइकिंग
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हॉट हो और दूसरी जो रिपीटीशन हो। हम मान लीजिए मैं यहां एक एग्जांपल देना चाहूंगा। एक बच्चा रोज भाग करके बस स्टॉप से बस पकड़ता है। उसके पापा उसको देखते हैं रोज और बोलते हैं कि बेटे भाग के बस नहीं पकड़नी लेकिन 19 20 साल का जो जवान
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खून है उसको तो आनंद ही इसी में आ रहा है कि वो भाग के बस पकड़े बस के पीछे लटक जाए ऊपर जाकर बैठ जाए। ठंडी हवा खाए। उसको आनंद ही है यार। पापा के रोज बोलने पर भी उसको समझ में नहीं आ रहा। एक दिन वो भाग रहा था। भागते-भागते उसके आगे एक और लड़का भाग रहा था। वो लड़का गिरा बस के।
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बड़ी स्ट्राइकिंग चीज थी। अगले दिन से वो भाग के बस नहीं पकड़ेगा। बड़ा यू नो इंटेंसिटी बहुत ज्यादा थी उस चीज की। या फिर रिपेटीशन किसी चीज जैसे खेत में हम जाते हैं रास्ते बन जाते हैं। घास है। घास पे आप चलते रहो रास्ता बन जाता है। मिट्टी
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आ जाती है। रिपीटीशन जब आप किसी चीज की करोगे तो बचपन में हमारे साथ रिपेटीशन बहुत की गई। लड़कियों को तुम लड़कियां ये नहीं करती। लड़कियां बाहर नहीं खड़ी होती। लड़कियां यह कपड़े नहीं डालती। लड़कियां रात को कभी नहीं निकलती। अब वो लड़की जो
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बच्चा नहीं है वो 25 30 साल की हो चुकी है। अभी भी वो रात को निकलने से डर रही है। क्योंकि बचपन में उसको रिपीट कर कर के रिपीट कर कर के रिपीट कर करके एक बिलीफ बना दिया गया। और रिपीट बनते भी ऐसे हैं। रिपीट जो सॉरी बिलीफ्स बनते भी ऐसे हैं और तोड़े भी ऐसे ही जाते हैं। या तो रिपीटीशन या फिर
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स्ट्राइकिंग। एक दिन आपके पास कोई चेतना आती है, एक दिन थॉट आता है और आप 40 साल पुराना अपना बिलीफ तोड़ देते हो। या फिर बार-बार बार-बार कंसिस्टेंसी कंसिस्टेंसी आप उस कंसिस्टेंसी के साथ उस बिलीफ को उसी तरह से चेंज भी कर सकते हो। दूसरे लेवल पर
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हम इमोशंस को आइडेंटिफाई करते हैं कि इस बिलीफ से मेरे इमोशंस क्या ट्रिगर हुए। अब आप देखो अब वह बिलीफ काम नहीं कर रहा है। उससे रिलेटेड इमोशन काम कर रहे हैं कि मेरे पास यह बिलीफ दिया गया कि तू यह जो
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ज्यादा पैसा कमाते हैं ना यह दो नंबर से आता है। अब मैं पैसा इसलिए नहीं कमा पा रहा क्योंकि दो नंबर का काम मैं कर नहीं रहा और मुझे लग रहा है कि अगर मेरे पास एक नंबर से भी आ गया तो भी दो ही नंबर वाला कंसीडर करेंगे। इसलिए मेरे पास डर है कॉन्शियसली नहीं सबकॉन्शियसली। तो वो डर
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मुझे पैसा कमाने ही नहीं दे रहा। एक बिलीफ है कि पैसा तो दो नंबर तो वो उसी में ही राजी है। वो कह रहा है कि अपन कम कमा रहे हैं लेकिन अपन दो नंबर का तो काम कर नहीं रहे क्योंकि पैसे का एसोसिएशन दो ही नंबर से है। उसको पता ही नहीं कि लोगों का जीवन बदल के भी आप अरबों रुपए कमा सकते हो। आप एक छोटी सी वेबसाइट बना के आप दुनिया के
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सबसे अमीर लोगों में अपना नाम शुमार कर सकते हो। बिलीफ है। तो, यह इमोशंस आइडेंटिफाई करके यह जो इमोशंस रखे हुए हैं, इनको हमें निकालना पड़ता है, शेड करना पड़ता है। इसलिए जब हम नो दसेल्फ में जब लोग हमारे पास आते हैं, तो हम पहले दो
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दिन तो सिर्फ इमोशंस निकालते हैं। निकालते हैं। उनको एक भाव हमारी एक एक्टिविटी होती है रिदममिक रिलीज मेडिटेशन। इसमें हम लोगों के शरीर से कि उनको बोलते हैं कि आप अपने शरीर से जितनी एक्टिविटी कर सकते हो ना उतनी एक्टिविटी करो सांसों के साथ। उ
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मतलब शरीर ऐसा कर दो तोड़ दो थका दो कि आपको शरीर का बोध खत्म हो जाए। जब भी आप तोड़ करके थका दोगे उसके बाद अपने अंदर से जो निकाल सकते हो निकालो। मैं नहीं कहता हूं कि यह निकालो वो निकालो। लोग जब अपने शरीर को तोड़ते हैं उसके बाद जो वो
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निकालते हैं आप देखोगे तो आपको लगेगा कि यार ये क्या हो रहा है? इतना कुछ भरा पड़ा है। वो इमोशंस हमारी बॉडी में स्टर्ड है हिमेश भाई। स्टर्ड हैं। एक बुक है बड़ी ब्यूटीफुल। उस बुक का नाम है बॉडी कीप्स द स्कोरर। बॉडी की आपके हर एक इमोशन का स्कोर आपकी
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बॉडी ने रखा हुआ है। संभाल के हर एक इमोशन एक पर्टिकुलर ऑर्गन पर अटैक कर रहा है। जैसे एंगर आपके लिवर पर अटैक कर रहा है। आप गुस्से में हो तो आपका फैटी लिवर मेरे से लिख लो। लिख लो। आप बोलोगे कि मैं शराब नहीं पीता। मैं अल्कोहल लिख लो लिवर पे
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अटैक होगा ही होगा। आप डरते हो आपकी किडनीज पे अटैक होगा ही होगा। अब देखो जब हमें डर होता है। बच्चे को जब डर होता है ना सबसे पहले क्या करता है? किडनी काम करना छोड़ दे। किसी को पुलिस पकड़ थर्ड डिग्री दिया जाता है। यूरिन निकल जाता है उसका। किडनी से कंट्रोल खत्म
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हो रहा है। वो फिल्ट्रेशन का काम बंद कर देती है। डर किस पे अटैक करता है? किडनी पे। इनसिक्योरिटी किस पे अटैक करती है?
आपके घुटनों पे। आपके पैर आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आपकी पूरी ऊपर की बॉडी ये जो अपर बॉडी है, अगर आपको लाइफ में रिस्पांसिबिलिटीज आ जाए, परिवार का बोझ आपके कंधों पे आ जाए, यह जगह में दर्द
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होने लगेगा, भारीपन होने लगेगा, सर्वाइकल होने लगेगा। आपके पास फाइनेंसियल बर्डन है। पैसे की कमी, पैसे की दिक्कत आप महसूस कर रहे हो लोअर बॉडी में। क्योंकि रीड की हड्डी का लोअर हमारे जीवन का आधार है। इंसान पैसे को भी अपने जीवन का आधार मानता है। आधार में दर्द हो जाता है। हर एक जो
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इमोशन है वो एक कॉरेस्पोंडिंग जगह पर इंपैक्ट डाल रहा है। और यह लुईस हे से पहली बार सीखा। वो बोलती है कि जिस इंसान की आत्मा रोई है उसने कैंसर डेवलप किया है। कोर सेल के अंदर डीएनए स्ट्रक्चर तक हिल गया है। इतना ज्यादा इमोशन गहरा बिठाया आपने। तो यह इमोशंस बॉडी कीप्स द
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स्कोर और बॉडी ने अपने 20 30 40 साल 50 सालों के इमोशंस जो हैं यहां स्टोर किए हुए हैं जो आपको आज नहीं दिख रहे लेकिन हो सकता है 2 साल 5 साल 4 साल 10 साल 1 साल 6 महीने बाद क्योंकि सिगरेट पीने से एकदम उल्टी होती तो सिगरेट पीने वाला छोड़ देता वो तो 20 साल बाद बताएगी कि मैं क्या कर
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रही हूं। ऐसे ये जो इमोशन अंदर रखे हुए हैं ये तो आने वाले समय में बताएंगे। इसलिए लोग जब वो सेकंड प्रोसेस में आते हैं और इमोशंस को शेड करते हैं। ओ हो हो लोग कहते हैं मतलब जब सेकंड डे हम ये प्रोसेस करते हैं 50% लोग ऐसे होते हैं वो
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बोलते हैं जी मेरा हो गया मैं बस हां बोले मैं मेरा रिट्रीट पूरा हो गया जी मेरा निकल गया सब इतना लाइट फील होता है जो कि कभी भी कॉन्शियसली अगर मैं मतलब आप मान लो मुझे कोई चैलेंज है और आप मुझे कह रहे हो उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य
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की प्राप्ति ना हो जाए अच्छा मैं घर जाकर फिर बैठ जाता हूं। लक्ष्य की प्राप्ति मैं तो मैं डिप्रेशन मेरे को लग रहा है डिप्रेशन की गोली खाऊंगा तो ही मुझे आनंद आएगा तो ही मैं ठीक से डिप्रेशन एंग्जायटी स्ट्रेस सुसाइडल थॉट्स लोग इससे निकल नहीं पा रहे
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हैं। उसका कारण यह है कि हम गलत जगह हम मोटिवेट किसको कर रहे हैं? बुद्धि को बुद्धि तो समझ गई कि मैं मोटिवेट हो गई। लेकिन मन और अहंकार अहंकार बोल रहा है। तेरे जीवन में बड़ा गलत इस आदमी को पता क्या है?
यह तो डिफेंडर पे आ रहा है।
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डिफेंडर पे जा रहा है। इसको क्या पता तुम्हारी साइकिल के पिछले टायर में पंचर है। तर्क देती है। मन तर्क देता है। अहंकार दूसरे आदमी से विरोधाभास उत्पन्न करता है। बड़ी गहरी साइंसेस हैं। तो यह काम कभी भी बुद्धि और मन कर ही नहीं सकते।
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यह काम है चेतना का। जब बुद्धि, मन और अहंकार हट जाएंगे। कब हटते हैं? जब शरीर का बोध हटे। तो 1 घंटा लोग अपने शरीर को तोड़ते हैं। 1 घंटे बाद यह लगता ही नहीं कि शरीर है। वो कहते हैं नहीं सुन हो गया। है ही नहीं। फिर वो अपने इमोशंस को शेयर
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करते हैं। तो मैं कहता हूं अपने इमोशंस को सरफेस लेवल पर लाकर निकालना पड़ता है। और फिर उसके बाद हम एक एक्टिविटी करते हैं। उसको बोलते हैं कथारसिस। कथारसिस मतलब रेचन। लिखो हम क्या है आपके जीवन में? उसको कागज पे उतारो। कागज पे उतारो। कागज पे उतारो। कागज पे उतारो। लिखते जाओ। आप देखोगे उस
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एक्टिविटी के बाद लोग ना हम उनको दो पेजेस देते हैं। लोग भाई साहब दो-दो नोटबुक भर देते हैं। हम एक्टिविटी के बाद 10 मिनट का ब्रेक देते हैं। वो ब्रेक डेढ़ डेढ़ दो-दो घंटे का हो जाता है। लोग लिखते ही जाते हैं। लोग कहते हैं खाना छोड़ो मुझे निकालने दो। अब सुनने वाला व्यक्ति ये कहेगा कि कागज पर निकालने से मेरे अंदर से
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कैसे खत्म होगा? मैं एक एग्जांपल देता हूं। आपके घर पे आपके कोई बड़े बुजुर्ग की फोटो रखी हुई है। कोई भी बड़े मतलब किसी को भी। चप्पल उठाओ घर जाकर उनको मारो। कहेगा यार
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यह क्या बात हुई? फोटो तो है। क्यों नहीं मारते?
बोले इससे मेरे भाव अटैच हैं। जब वो एक्टिविटी के बाद आप लिखते हो आपके भाव डिटच हो जाते हैं। कागज पर निकलते जाते हैं और फिर हम एक बहुत बड़ी सी बोर्न फायर आग जलाते हैं। सेलिब्रेट करते हैं। मतलब
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हमारे सभी पार्टी झिंगा लाला जो होता है ना वो आदिवासी लोग करते वैसा पूरा सेले आग के चारों तरफ नाचते हैं और हम ये भाव करते हैं कि वो इमोशंस जो मेरे अंदर से निकले थे उनको मैंने कागज पे उतारा और मैं उनको जला। अरे हम आदमी जला आते हैं। 13 दिन बाद उसको याद नहीं करते। तो ये तो छोटे से
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इमोशंस हैं। अगर यह भाव इंसान को दिया जाए कि इसका दाह संस्कार तुमने कर दिया। ये तुम्हारे अंदर से निकल गए तो वो जब ट्रांस की स्टेट में होते हैं उनको यही फील होता है कि मैंने अपने अंदर से निकाल दिया। तो पहला उन बिलीव्स को आइडेंटिफाई करना। माइंड में घुस के एम से ई से वो जो इमोशंस हैं उन
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इमोशंस को आपके अंदर से निकालना जो रूट अपना बना के बैठे हुए हैं। चाइल्डहुड ट्रॉमाज़, ग्रीफ, सोरो किसी को यह मतलब लैक ऑफ लिमिटिंग बिलीफ, सेल्फ सेबोटेजिंग, किसी को लगता है कि मैं लेट गो नहीं कर पा रहा हूं बहुत सी चीजें। किसी को लगता है
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कि मेरे साथ गलत हुआ है। तो, ये सब बिलीफ्स हमारे पास 5,000 तरह के रखे हुए हैं। इमोशनल कैथरेसिस से हम इनको बाहर निकाल। अगले सेगमेंट में बढ़ने से पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी बुक द मैनिफेस्टेशन ब्लूप्रिंट लॉन्च हो चुकी है। यह सिर्फ एक बुक नहीं है। यह एक
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सिस्टम है जो आपकी कंफ्यूजन को क्लेरिटी में बदलेगा। आपको ओवरथिंकर से एक्शन टेकर बनाएगा और मैनिफेस्टेशन को साइंटिफिकली स्टेप बाय स्टेप समझाकर आपके थॉट्स को रियलिटी में कन्वर्ट करना सिखाएगा। इस बुक में अराउंड 15 मिरर मोमेंट्स हैं। मतलब के
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थॉटफुली डिज़ क्वेश्चंस जो आपको खुद के बारे में गाइडेंस और डायरेक्शन देंगे। और इसी बुक में 21 डेज का एक डेली प्लान है। क्यों? सो दैट यह बुक सिर्फ नॉलेज ना दे। आपका हाथ पकड़ कर आपकी लाइफ में एक पॉजिटिव चेंज लाए। इस बुक को ऑर्डर करने का लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल
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जाएगा। वापस चलते हैं पडकास्ट में। फिर हम थर्ड से थर्ड पे जाने से पहले हमने बिलीफ आइडेंटिफाई किया। हमने समझ हम समझे कि यह बिलीफ मुझे रोक रहा है। मान लो पैसा मेरे पास टिकता नहीं है। यह एक बिलीफ है। जिस वजह से जब पैसा आता है या तो मैं खर्च लेता हूं या मैं सोचता हूं मेरे पास टिकता
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ही नहीं है तो मुझे क्यों ही कमाना है। राइट? जनरली यह बिलीफ भी बहुत कॉमन है। पैसा मेरे पास टिकता नहीं है। मेरी किस्मत में नहीं है। अब जब इमोशन स्टेज पर आए तो उसके रिलेटेड इमोशन प्रैक्टिकली घर बैठे अगर कोई करना चाहे इस चीज को तो कैसे वो
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अपने इमोशंस से डिटच हो सकता है। इस एग्जांपल के साथ या कोई भी एग्जांपल के साथ आप एक्सप्लेन अगर कर पाओ। या फिर जो आपने रिट्रीट में एक्सपीरियंस किया हो कि इस तरह की इमोशंस निकली थी। सो दैट थोड़ा सा ऑफकोर्स सेम एक्सपीरियंस नहीं हो सकता। बट एक सम एक्सपीरियंस बंदा घर
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बहुत बहुत बढ़िया हो सकता है। जैसे आपने बहुत अच्छा ये एग्जांपल लिया कि मान लो पैसा मेरे पास टिकता नहीं तो इसमें मेरे पास दो इमोशंस की बहुत भारी कमी है। हम वो दो इमोशंस क्या है? एक तो मेरे पास जो है वो तो लैक है। हम हम लैक का इमोशन होता है तभी मेरे पास ये भाव
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आता है कि मेरे पास टिकता नहीं है। दूसरा कमी किस चीज की है? अबंडेंस की। मेरे पास अबंडेंस माइंडसेट नहीं है। मैंने एक बुक पढ़ी थी कैन Honda की उसमें उन्होंने पैसे के बारे में बहुत ब्यूटीफुल कांसेप्ट लिखा। तो उन्होंने ये दो कांसेप्ट समझाए। इसके
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बाद मेरी भी लाइफ बदल गई। तो वो जो सुन रहा है वो यह काम कर सकता है। उन्होंने कहा एक तो सबसे पहले यह भाव लेके आओ कि पैसा अबंडेंस में है। हर चीज अबंडेंस में है। दूसरा जो मेरे पास टिकता नहीं है उसका धन्यवाद करो।
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उन्होंने इस कांसेप्ट को बोला है आरिगातो मनी। आरिगातो मतलब ग्रीट जैपनीज में हम ग्रीट करते हैं किसी को भी। धन्यवाद देते हैं तो हम आरगातो बोलते हैं तो वो बोल आरगातो मनी मैंने पढ़ना शुरू किया आगे वो लिखते हैं आरगातो इन आरगातो आउट
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अब ये बड़ा कंफ्यूजिंग था मैंने कहा जो आ रहा है उसका तो आरगातो उसका तो चारगातो लारी गातो जो कराना है करा लो लेकिन जो जा रहा है उसका क्यों उसका वो जो सोच रहा है ना पैसा मेरे पास टिकता नहीं है जो नहीं टिकता उसका भी आरगात तो करो
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क्योंकि आप आने या जाने को एनर्जी नहीं दे रहे हो अच्छी या बुरी आप पैसे पैसे को एनर्जी दे रहे हो बुरी। उनका कहने का मतलब है कि आरगातो इन आरगातो आउट। अगर आपके पास से पैसा गया तो वो किसी पर्पस के लिए गया।
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कई लोग बोलते हैं मेरा इलाज पे ₹ लाख लग गया। मैं क्या मैं कहता हूं अगर 2 लाख ना होते तो क्या इलाज हो पाता? तो क्या वो पैसा नेगेटिव था?
उसका तो आपको आभार करना चाहिए कि आपको इलाज देके गया। अरे मेरे बच्चे की पढ़ाई पे ₹1 लाख लग गया। आपका बच्चा जो पढ़ा है जो कल को कुछ
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बनेगा तो उस पैसे का आभार करो। क्योंकि वो पैसा एक एनर्जी है और जितनी भी एनर्जी हैं वो सिमिलर एनर्जी को ही अट्रैक्ट करती हैं। सिमिलर एनर्जी सिमिलर फ्रीक्वेंसी आपने उसको एनर्जी क्या दी? पैसे को नेगेटिव एनर्जी दी। आपने ये नहीं देखा कि
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पैसा टिकता नहीं है। टिक बेकार यार ये तो पैसा ही मेरे आपने पैसे को नेगेटिव एनर्जी दी। तो आरगा तो इन आरिगा तो आउट। जो आए उसका भी भला जो जाए। अब आप यह भाव दो कि यह जिसके भी पास जाए उसके जीवन में भी यह ऐसे ही हेल्प करें जैसे इसने मुझे हेल्प
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किया था। अरे कैसे शिफ्ट नहीं आता है सिर्फ एक भाव बदलने से। लेकिन क्योंकि यह फिर से एक मोटिवेशनल स्टेटमेंट रह जाएगा। सिर्फ यह ट्रांसफॉर्मेशनल नहीं बनेगा। क्योंकि ये सुन के एक्सपीरियंस करना थोड़ा मुश्किल है। जब आप उस चीज को बॉडीली
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प्रैक्टिस करते हैं। व्हेन देयर इज नो बॉडी, व्हेन देयर इज नो माइंड, व्हेन देयर इज नो थॉट। हम जब आप उस स्तर पर जाकर उन कमांड्स को ले प्रैक्टिस करते हैं तो आप इसको बहुत अच्छे से कर पाते हैं। तो अगर ये जो लोग भी मुझे घर बैठे सुन रहे हैं अगर वो कुछ देर की कोई फिजिकल एक्टिविटी करें जिसमें वो अपने
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शरीर को पूरा थकाएं जैसे कि डांस कर लिया डांस कर लिया कर लिया कार्डियो कर लिया कुछ भी लेकिन वो निरंतर होनी चाहिए उसमें ब्रेक नहीं होना चाहिए जैसे हम भस्त्रिका करते हैं जैसे हम कपालभाति करते हैं कोई ब्रेक नहीं है कंटीन्यूअसली हम कर रहे हैं ऐसा कोई भी
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फिजिकल एक्टिविटी आप डांस कर लो मैं तो कहता हूं जब तक थको नहीं 1 घंटा 1 घंटा जब तक शरीर सुन्न ना हो जाए भाई हम्म कि अब तो मैं हूं वो क्योंकि 20 मिनट बाद शरीर बोलेगा या तो मैं नहीं या तू नहीं मुझे छोड़ दे या मैं तुझे छोड़ देता हूं ये भाव से आप ऊपर निकलो आप आधा एक घंटा
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लगा के शरीर को पूरा तोड़ो उसके बाद आप बैठ जाओ आप देखोगे ना आपके पास मन होगा ना आपके पास बुद्धि होगी ना आपके पास कोई थॉट होगा उस समय पर वो लिखना शुरू करो कि आपके अंदर से क्या निकला क्या थॉट्स निकले क्या इमोशन सबसे पहले निकलेगा लैक दूसरा निकलेगा कि अबंडेंस का भाव नहीं तीसरा
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निकलेगा फियर पैसे को लेके डर है कहीं ना कहीं आपके अंदर कि पैसा पैसा तो मैं कमा ही नहीं सकता क्योंकि मेरे पास स्किल नहीं है। पैसा मेरे पास इसलिए नहीं टिकता है क्योंकि मैं ऊपर वाला मेरे ऊपर ध्यान ही नहीं देता। डर है किसी चीज का। मैंने 16 सोमवार नहीं किए। मैंने मंगलवार मैंने प
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तो ये खुद से थॉट्स आएंगे कि क्या पहले बिलीफ सोचा हुआ है इस बिलीफ पे काम करना। खुद से इसीलिए मैं बोल रहा हूं अगर ये आप पहले से सोचोगे तो ये मैकेनिकल हो गया। आप फिजिकल एक्टिविटी करोगे जब और रिलैक्स होके बैठोगे और आप अपने अंदर से वेंट आउट करोगे तो आप कागज पे निकाल पाओगे। जो जो
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चीजें आपने सोची भी नहीं थी जो घर पे सुन रहा है वो अपना उस एक्टिविटी को करें उसके बाद वो कथोरेसिस करे लिखे पेपर पे अच्छा कथारेसिस का मतलब है अपने अंदर से उन इमोशंस को निकालना अब कई लोग निकाल के ना उसको फ्रेम करा लेते हैं या वो चार लोगों
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पढ़िए यार देख क्या निकाला है देखो कहां-कहां से बातें आई है पता नहीं कहां से आई हैं ना पढ़ना है ना पढ़ाना है जो निकाला है उसको जला दे या सिजर है तो सिज़र से भी बढ़िया है कि आपका माइंड ये देखे कि ये खत्म हो गया।
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भाव अटैच हो गया लिखते लिखते उसके साथ और उसको देखें कि वो खत्म हो गया। एक छोटा सा प्रोसेस देखो आपके बिलीफ्स कैसे नहीं बदलते। कैसे नई प्रोग्रामिंग नहीं होती, बॉडी प्यूरिफाई कैसे नहीं हो जाती। क्योंकि जिंदगी में नया सीखना जरूरी नहीं है। लर्निंग इज नॉट दैटेंट। अनलर्न करना
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उससे ज्यादा इंपॉर्टेंट है जो हमने गलत सीखा हुआ है। क्योंकि नया सीखना भी तब घटित हो पाएगा जब वो अनलर्न होगा। जगह बनेगी। नए कपड़े वार्ड्रोब में क्लोजेट में तब आएंगे जब पुराने खाली होंगे। लोग जगह ही नहीं बना रहे हैं। भाई जगह बनाओ नए कपड़े अपने आप आने लगेंगे। तो सबसे पहले
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हमने माइंड में बिलीफ्स को आइडेंटिफाई किया। फिर हमने इमोशंस जो हमारे पास दबे पड़े थे। सप्रेस्ड थे। पास्ट की पेनफुल मेमोरीज थी, ट्रॉमास था, चाइल्डहुड अब्यूज था, कोई धोखा था, कोई लॉस था। वो इमोशंस जो कहीं पड़े हैं उनको हमने रिलीज किया। थर्ड स्टेप में स्टेज में हम आते हैं तो
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हम मेडिटेशन प्रैक्टिससेस करते हैं। अब मेडिटेट करने की चीज नहीं। यह एक स्टेट है जिसको हम एक्सपीरियंस करते हैं। हम मेडिटेटिव स्टेट में होते हैं। लेकिन आज ज्यादातर लोगों के साथ चैलेंज ये है कि वो मेडिटेट मेडिटेटिव स्टेट में जा
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नहीं पाते। तो सबसे बड़ा ध्यान क्या है? सबसे बड़ा ध्यान यही है कि आप अपनी कोई भी फिजिकल एक्टिविटी कोई भी जो भी आप कर रहे हो जिम जा रहे हो जुम्बा कर रहे हो आप कार्डियो कर रहे हो कुछ भी कर रहे हो उस फिजिकल एक्टिविटी के एकदम बाद आप ध्यान के
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लिए बैठिए अगर आप घर पे कर रहे हैं तो क्योंकि अब आपकी पूरी एनर्जी जो हैं वो बॉडी के साथ कनेक्टेड हैं। आपकी एनर्जी सरफेस लेवल पे आई हुई हैं। आपके पास थॉट्स बिल्कुल कम हैं। उस टाइम पे अगर आप ध्यान में बैठोगे तो आप देखोगे आपका ध्यान गहरा
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होगा। एक चीज और मेडिटेशन में छोटी सी चीज़ ऐड करना चाहूंगा। साइलेंस सिर्फ साइलेंस साइलेंस ऑफ वर्ड्स। साइलेंस ऑफ वर्ड्स और साइलेंस ऑफ थॉट्स। अब देखो हमारे पुराने लोग मौन व्रत रखते थे। स्पेशल मतलब क्या कारण होता होगा?
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हमारी एनर्जी जब हम मेडिटेट करते हैं ना तो हमारी सिक्स्थ सेंटर को हमारी सबसे ज्यादा एनर्जी चाहिए होती है। वो एनर्जी हमारे पास है नहीं क्योंकि वो देखने में, सुनने में, महसूस करने में, विचारों में सबसे ज्यादा एनर्जी थॉट्स में जाती है। सबसे ज्यादा किसी को लगता है कि
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मैंने 4 घंटे काम किया, आपने जितना 4 घंटे काम करके एनर्जी खर्च की है, आप 4 घंटे बकब-बक करते रहो, दिमाग के अंदर उतनी एनर्जी लग जाएगी एनर्जेटिक लेवल पर। तो विचारों का मौन, साइलेंस बहुत ज्यादा जरूरी है। तो अगर आप कुछ देर के लिए
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साइलेंस प्रैक्टिस कर पाओ और इसका सबसे अच्छा तरीका जो घर पे बैठ के कर रहा है मैं उसको देना चाहूंगा कि सिर्फ ये देखो कि दिमाग में विचार कहां आ रहे हैं। अभी हम सब लोग यहां बैठे हैं। आप देखो कि दिमाग के यहां प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में ट
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विचार दिमाग में आते कहां है? जरा ऐसे देखना एक बार सब लोग। कहां गए?
साइलेंस में आ जाते हो आप। आपने जैसे ही विचारों को देखा आप विचारों से अलग हो गए और शुरुआत कभी भी जो लोग सुन रहे हैं वो
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कभी भी आधा घंटा एक घंटा से ना करें। ये मेरी रिक्वेस्ट है स्पेशल रिक्वेस्ट क्योंकि अगर मेरा वेट 102 है और मैंने टारगेट लिया 60 का हम तो समझो 2 दिन में मेरा काम तमाम है।
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क्योंकि गैप बहुत बड़ा है। हम मैं उसको फिल नहीं कर पाऊंगा और मुझे कोई ट्रिगर और कोई मोटिवेशन भी नहीं मिलेगी। लेकिन अगर मेरा वेट 112 है और मैंने 10001 का टारगेट लिया हम यूं होंगे काम तो 1 घंटे का टारगेट नहीं लो कि मैं 1 घंटा बैठूंगा क्योंकि 5 मिनट
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के बाद बोरिंग होने लगेगा आपको लगेगा यार ये क्या कुछ नहीं करना ये भी जीवन का कोई काम है हम आप टारगेट लो सिर्फ पांच कि आज मैं 5 मिनट बैठूंगा और ये 5 मिनट आपको रिवॉर्ड देगा इट्स नॉट अबाउट कि आपने 5 मिनट किया या एक
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घंटा किया इट्स अबाउट कि आपने टास्क पूरा किया तो आप अपने ब्रेन को एक रश देते हो कि मैंने मेडिटेट कर लिया। ओ ये कम ऑन मैंने मेडिटेट उसको नहीं पता कि एक घंटा किया या 5 मिनट। 5 मिनट के बाद जब आपको धीरे-धीरे आप प्रेजेंट स्टेट में आने लगो उसको 10 उसको
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15 उसको 20 उसको। फिर आप नहीं करोगे। एक घंटा पहले दिन बैठोगे आप करोगे जबरदस्ती। आपकी बुद्धि कहेगी कि बैठना है। लेकिन फिर उसके बाद आपकी चेतना पुकारेगी और आपको पता भी नहीं लगेगा कि कब घंटों बीत गए और आप ध्यान की अवस्था में बैठे। सो थर्ड स्टेट कि हम मेडिटेटिव एक्सपीरियंसेस को अपनी
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जिंदगी में थोड़ा सा उतारें। चौथी चीज कि हम अपने एनर्जीस का ट्रांसफॉर्मेशन करें। हम जब मैं इन एंशिएंट इंडियन हीलिंग साइंसेस को पढ़ना शुरू किया तो आप जानते हैं सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मेटिव चीज मुझे क्या पढ़ने
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को मिली? मैंने जो हमारे अद्वैत में दो बहुत मुख्य ग्रंथ हैं। एक विवेक चूड़ामणि है। आदि गुरु शंकराचार्य ने लिखा। एक तत्वबोध है और एक तैत्रय उपनिषद। इन तीनों में से एक चीज बड़ी ब्यूटीफुल कंक्लूजन निकल के आया कि वी आर नॉट जस्ट अ बॉडी। हम
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पंचकोषों से बना हुआ एक पिंड है। अन्नमय कोष द फिजिकल बॉडी जो अन्न से बनती है। प्राणमय कोष द इलेक्ट्रिक बॉडी जो प्राणों से बनती है। जिसमें 72,000 नाड़ियां हैं जिसमें शरीर के सात चक्र हैं। मनोमय कोष द
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मेंटल बॉडी जो हमारे विचारों से हमारे थॉट्स, इमोशंस एंड फीलिंग से बनती है। फोर्थ विज्ञानमय कोष जो हमारे इंटेलेक्ट से बनता है। फिफ्थ आनंदमय कोष जो ब्लिस बॉडी है जिसको हम सिर्फ एक्सपीरियंस कर सकते हैं जब हम इन चारों शरीरों के परे निकल जाए तो
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तो एनर्जी का ट्रांसफॉर्मेशन करना बहुत जरूरी है जिसको हम ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन बोलते हैं एनर्जी को ऊपर ट्रांजेंटल एक्सपीरियंस देना अपने हायर स्टेट तक लेकर के जाना वो इस फिजिकल बॉडी के बस में नहीं तो हम एक ऐसी प्रैक्टिस करते हैं जिससे हम
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ये फिजिकल बॉडी का भाव छोड़ दें उसको हम लोग बोलते हैं स्पेस मेडिटेशन हम लगभग एक घंटे का वो प्रोसेस होता है। उस प्रोसेस में हम लोग यह भूल जाते हैं कि मैं एक बॉडी हूं और बहुत से लोग उस प्रोसेस में आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंस करते हैं। वो अपने शरीर को देखते हैं कि वो
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पड़ा हुआ है और मैं शरीर में नहीं हूं। तो ये बहुत गहरी ध्यान की अवस्था में आता है जब हम कुछ ट्रांस में जाकर कुछ हिप्नोटिक कमांड्स लेके करते हैं। लोग ऐसा एक्सपीरियंस करते हैं डिवाइन। मतलब लोग अपने बहुत लोगों से भी कनेक्ट कर जाते
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हैं। बहुत चीजों से भी कनेक्ट कर जाते हैं और जिंदगी के इतने सवालों के जवाब मिल जाते हैं। लेकिन यह एक जो बिगिनर है जो इंटरमीडिएट लेवल पर मेडिटेशन कर रहा है उसके लिए पॉसिबल नहीं है क्योंकि इससे पहले ब्रेथ की बहुत सारी एक्टिविटीज होती हैं। हम जिसमें मैं कुछ बताना चाहूंगा अगर कोई
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करना चाहे घर पे तो वो कर सकता है। जिसमें सबसे पहली है बॉक्स ब्रीथिंग। हम बॉक्स ब्रीथिंग में क्या करना है कि आपको चार सेकंड का इन्हेल हम 4 सेकंड का होल्ड हम 4 सेकंड का एक्सेल 4 सेकंड का होल्ड इससे
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दो काम होते हैं। पहला आपकी सांसे गहरी होने लगती हैं। हम 1 मिनट में लगभग 18 से 20 सांस ले रहा है एक आम इंसान। और अभी रीसेंट स्टडी तो 27 बता रही है सर। 27 मतलब 1 मिनट में 27 सांस यानी एक इन्हेल एक सेकंड का और
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एक्सेल एक ही सेकंड का। जबकि हमारा इन्हेल कम से कम 3 सेकंड्स का होना चाहिए। और हमारा एग्ेल भी 3 सेकंड्स का होना। कम से कम इस अवस्था पर हम है नहीं। जब हम इस अवस्था पर नहीं है तो हम अपने प्राणमय कोश में एंटर नहीं कर सकते।
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हम उसके लिए हमारे सांसों का प्रवेश सांसों के थ्रू हम प्रवेश करते हैं। तो सांसेटल होनी रिलैक्स होनी चाहिए। टेक अ डीप ब्रेथ इन एंड डीप ब्रेथ। टेक अ डीप ब्रेथ इन एंड डीप ब्रेथ अप। तो इसको हम बॉक्स ब्रीथिंग से करते हैं। इसमें हम लगाते हैं कुंभक। हम कुंभक मींस ब्रेथ रिटेंशन। हम
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इन्हेल फोर सेकंड्स, ब्रेथ रिटेंशन यानी अंतः कुंभक 4 सेकंड्स, एग्हेल फोर सेकंड्स, बाह्य कुंभक यानी सांस छोड़ने के बाद होल्ड 4 सेकंड्स। तो एक सांस पूरी कंप्लीट हुई और कितनी देर लगी? लगभग 16 सेकंड्स। हम
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तो 1 मिनट में मैंने कितनी सांस ली? चार सांस। लगभग एक एवरेज माने और मैं ले कितनी रहा था?
27 अब मेडिकल साइंस ये बोलती है कि वी हैव टू सिस्टम्स। सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम एंड पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम। द ओनली वे टू
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ट्रिगर योर पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम इज़ डीप ब्रीथिंग। व्हेन यू इन्हेल स्लोली होल्ड एंड एक्सेल स्लोली ये आप और पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम अगर किसी इंसान का ट्रिगर हो जाए आप कितनी स्टडीज उठा के देख लो कि वो जिंदगी में कभी
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डिप्रेशन में नहीं जा सकता। मैं यहां पे कहूंगा ऑडियंस के कॉन्टेक्स्ट के लिए अगर सिंपैथेटिक और पैरासिंथेटिक आप एक बार एक्सप्लेन कर दो। श्योर हमारी बॉडी दो पार्ट्स में डिवाइडेड है। इसको हम बोलते हैं हमारा ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम। ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम दो पार्ट्स में डिवाइडेड है। एक हमारी नाभि से ऊपर का
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केंद्र। एक हमारी नाभि से नीचे का। तो नाभि से नीचे नेवल पॉइंट से नीचे इसको हम लोग साइंस बोलता है पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम। और नाभि से ऊपर को बोलता है सिंपैथेटिक। सिंपैथेटिक क्या है? सिंपैथेटिक इज फाइट एंड फ्लाइट मोड। पूरा लड़ना, भागना, काम
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करना, बात करना, ये वो पूरा सिंपैथेटिक। हम्म। व्हेन यू आर इन सिंपैथेटिक मोड, योर बॉडी कैन नॉट हील। यू कैन नॉट एक्सपीरियंस एनी डिवाइन थिंग। आप कोई मेडिट सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम में आप सिर्फ फाइट एंड फ्लाइट कर सकते हो। दिस इज वेरी एसेंशियल। मान लो मेरे सामने से
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एक बस आ रही है। अब बस के लिए या तो मैं उससे फाइट करूंगा या मैं भागूंगा या लडूंगा। दो काम। अब इसके लिए मुझे क्या चाहिए? फाइट एंड फाइट। वो क्या है?
सिंपैथेटिक। उसके लिए मेरी सांस छोटी होनी चाहिए। मुझे भागना है तो, लड़ना है तो सांस छोटी होनी
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चाहिए। मुझे कोई भारी वजन उठाना है सांस छोटी होनी चाहिए। मैं सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम में हूं। दिस इज फाइट एंड फ्लाइट। दिस इज सर्वाइवल मोड। सर्वाइवल मोड। पैरासिंैथेटिक मींस रेस्ट एंड डाइजेस्ट मोड। नॉट फाइट एंड फ्लाइट। सिंपैथेटिक मींस फाइट एंड फ्लाइट मींस
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सर्वाइवल। पैरासिंैथेटिक मींस रेस्ट एंड डाइजेस्ट मींस हीलिंग। हम अगर मैं सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम के मोड में हूं, मेरा शरीर हील नहीं करता है। जी, मेरा शरीर डाइजेस्ट भी नहीं करता है। अगर मान लो मेरे घर पे कोई अटैक हो गया किसी
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का कोई चोर, डाकू, कुछ भी और मैं खाना खा रहा हूं। अब मेरे घर पे अटैक हुआ तो क्या मैं उनको बोलूंगा? रुको दो मिनट खाना खाने दो। या मैं डायरेक्ट मेरी बॉडी कहती है व्हेन यू आर इन सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम तो तुम्हारा जो डाइजेशन है वह मेरा काम
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नहीं है। मेरा काम है फाइट और लाइट। या तो मुझे जो बाहर की सिचुएशन है इससे लड़ना है या मुझे। अब आप कहोगे जी मेरे सामने बस कम आती है। मैं शेर के सामने कम जाता हूं या मैं हस्बैंड वाइफ की आपस में लड़ाई कम होती है। तो मेरा आपके बिलीफ सिस्टम ने आपका फाइट एंड फ्लाइट मोड 24 घंटे ट्रिगर
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करके रखा हुआ है। हमारी सांसे इतनी छोटी हैं। दिस इज द साइन। बुखार इज नॉट अ डिजीज। इट्स अ सिम्टम जो बताता है कि अंदर कुछ गड़बड़ी है। वो फाइट कर रहे हैं तुम्हारे बैक्टीरिया। वो अंदर एंटीबॉडीज बैक्टीरिया से फाइट कर रही
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है। जिसकी वजह से मैंने तापमान बढ़ाया है। दिस इज अ सिम्टम। हम हम ठीक वैसे ही यह जो हमारा स्ट्रेस मोड है, यह तो सिम्टम है। वह कह रही है कि अंदर रूट में कुछ विचार रखे हुए हैं जो 24 घंटे तुम्हें फाइट एंड फ्लाइट में ला कर के रख रहे हैं।
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अगर मैं डीप ब्रेथ लेता हूं तो मेरी बॉडी को पता चलता है ऑल इज वेल चाचू। हम क्योंकि मैं डीप ब्रीथिंग पता है कब लेता हूं? जब मैं सोया हुआ होता हूं। जब मैं शांत बैठा हूं। रिलैक्स्ड। जब मैं रिलैक्स्ड हूं। जब मैं काम हूं। आप देखोगे जब भी आप 500 तरह के काम खत्म करके
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आकर बैठोगे आपकी बॉडी करेगी। आप आनंद में होगे आप गहरी सांसे लोगे। सो योर बॉडी इज एंकरर्ड। गहरी सांस एक जब आप छोटे थे, मैं छोटा था, जब हम बच्चे थे, हम गहरी सांस लेते। कोई टेंशन नहीं। आप देखो बच्चा सोया हुआ
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होता है ना, उसका पेट फूलेगा। उसकी छाती नहीं फूलेगी, हमारा पेट फूलता ही नहीं है। इसलिए हमें पता ही नहीं सांस लेने पे, पेट अंदर आता है क्या बाहर? तो अगर मैं गहरी सांस लेता हूं और मेरी सांस जो 1 मिनट में जो 27 चल रही, 20 चल रही, 15 चल रही वो अगर तीन पर आ जाए, चार
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पे आ जाए तो मेरी बॉडी को पता लगता है ऑल इज वेल चार्ट। बॉडी तो प्रोग्रामिंग से चलती है। और मैं इसको क्या बता रहा हूं कि मैं ट्रिगरर्ड नहीं हूं। तो अगर मैं 5 मिनट बॉक्स ब्रीथिंग करता हूं। गहरी सांसे ली 5 सेकंड में 4 सेकंड का इन्हेल। आप
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YouTube पर सर्च करेंगे बॉक्स ब्रीथिंग। आपको 5000 वीडियोस मिल जाएंगे। उसको प्ले कीजिए लगाइए। वो बोलेगा इन्हेल 1 2 3 4 5 होल्ड 1 2 3 4 5 एक्सेल 1 2 3 4 5 देन होल्ड 50 वीडियो 5000 वीडियो मिल जाएंगे
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सिंपल बॉक्स ब्रीथिंग करोगे और हमारे कितने पार्टिसिपेंट्स हिमेश भाई हमारे पास आते हैं वो बोलते हैं जी मेरा वेट कम हो गया मेरा मेरे को यूरिन इंफेक्शन था मेरा वो ठीक हो गया मेरे ब्लैडर का प्रॉब्लम था मुझे वो ठीक हो गया फीमेल्स आती है बोलती है यूट्रस में दिक्कत थी वो मेरा बिल्कुल रिज़ॉल्व हो गया सिर्फ ब्रेथ से दिस इज
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नॉट जस्ट ब्रेथ जैसे जैसे ब्लड है। अब एक आम आदमी के लिए मेरे और आपके लिए वो ब्लड है। डॉक्टर के लिए उसमें 13 कॉम्पोनेंट्स हैं। जी। 13 उसको पता है इसमें डब्ल्यूबीसी भी है। उसको पता है इसमें आरबीसी भी है। उसको पता है इसमें प्लेटलेट्स भी है। इसमें प्लाज्मा भी है।
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और किसी को प्लेटलेट की जरूरत हो तो डॉक्टर निकाल के उसको दे भी सकता है। कि तू प्लेटलेट्स लेट जा। तू प्लाज्मा ले जा। आरबीसी इसको दे देते हैं। डब्ल्यूबीसी इसको दे देते हैं। हमारे लिए क्या है? खून। आम आदमी के लिए सांस है। इसमें प्राण भी प्रवाह हो रहा है। इसमें आकाश तत्व भी
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प्रवाह हो रहा है। इसमें ईथर तत्व भी प्रवाह हो रहा है। इसमें पांचों पृथ्वी, अग्नि, जलवायु, आकाश के तत्व हैं। मेरे शरीर को जैसे मेरी एक बॉडी पार्ट को मिलता है रेड ब्लड सेल। मेरे एक बॉडी पार्ट को मिलता है प्लाज्मा। ऐसे ही मेरी सांसों से मेरी फिजिकल बॉडी
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को मिलती है ऑक्सीजन। लेकिन मेरे प्राणमय कोश को मिलता है प्राण। हम इसीलिए ऑक्सीजन सिलेंडर कितने भी लगा लो इंसान प्राण चले गए तो वो वापस नहीं आते। जी क्योंकि ऑक्सीजन तो लग
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रही है। मेरा कहने का ये मतलब नहीं है। सांसों में ऑक्सीजन नहीं है। है लेकिन इसमें प्राण तत्व भी है जो मेरे जिंदा रहने पर मुझे प्राप्त हो रहा है। तो अगर मैं बॉक्स ब्रीथिंग करता हूं मेरे प्राण वायु का संचार होता है। मेरे पूरे शरीर में। मेरा पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होगा तो मैं काम होगा। किस मोड
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में हूं? रेस्ट एंड डाइजेस्ट। माइंड को क्या पता लग रहा है?
ऑल इज वेल चार्ज। और वो किस मोड को हीलिंग को किस मोड को ट्रिगर करता है? हीलिंग को। वो कहता है अब तुम्हारे घर अटैक नहीं हो रहा। खाना खाओ मैं डाइजेस्ट करता हूं। खाना खाओ इससे मैं एनर्जी अब्सॉर्ब करता हूं। इसीलिए लोग कई आते हैं वो बोलते हैं सर खाने में ये चेंज कर ले। मैं कहता हूं
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जो खाना है खाओ। हम हम तो ब्रेथ को जब हम प्रैक्टिस करते हैं तो ब्रेथ को प्रैक्टिस करने के बाद हम महसूस करते हैं कि हमारी एनर्जी एलिवेट हुई। और फिर उन एनर्जीज को एलिवेट करके हम सप्त चक्र ध्यान लोगों को रिकमेंड करते हैं कि
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हमारी प्राणमय कोश में सात एनर्जी सेंटर्स हैं। सात चक्र जिनको षटचक्र निरूपम एक ग्रंथ में सबसे पहले डिस्क्राइब किया गया था जिसको नालंदा और तक्षशिला से तबाह किया गया, बर्बाद किया गया। लेकिन आज भी उसकी कुछ ओरिजिनल कॉपीज मिलती हैं हमें। उसमें बताया गया कि अगर आप अपने सेवन चक्रास को
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बैलेंस करते हो तो आपकी फिजिकल बॉडी इज अ बाय प्रोडक्ट ऑफ योर एनर्जी बॉडी। हम मेरे पास मान लो मेरा फोन है। हम हम फोन का अगर सॉफ्टवेयर करप्ट हो जाए हम तो वो को फोन कितना महंगा है मेरे काम का मैं उससे कुछ नहीं कर सकता। हां कील ठोक
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सकता हूं लेकिन वो मेरे लिए फोन का काम नहीं करेगा। अगर मेरी प्राणमय कोश में एनर्जी इम्बैलेंस हो जाए तो मैं कितना प्रयास कर लूं मैं अपनी फिजिकल बॉडी को अपनी लाइफ को अपने मैनिफेस्टेशन को किसी भी चीज को ठीक नहीं कर सकता। मेरे प्राणमय कोश में एनर्जीस अलाइन है तो मैं सब कुछ
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कर सकता हूं। अब यह सुनने में ऑकल्ट लगता है। लेकिन जब हम इसको एक्सपीरियंस करते हैं तो मैं आपके साथ शेयर करना चाहूंगा। हमारे एक पार्टिसिपेंट आए उनको एक ऐसा चैलेंज था बहुत लाइफ थ्रेटनिंग डिजीज। डॉक्टर ने बोला कि थोड़े दिन बचे हुए हैं और वो उनको प्रोस्टेट से रिलेटेड था।
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आज हर तीन में से एक मेल प्रोस्टेट की समस्या से जूझ रहा है। उनको प्रोस्टेट से रिलेटेड था। और आप यकीन मानो जब उन्होंने सप्तचक्र ध्यान शुरू किया तो 90 डेज तक जब वो ध्यान कर रहे हैं तो उनको रेड कलर नहीं दिख रहा है। सात
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चक्रों के सात कलर हैं। सेवन एनर्जी सेंटर्स के सेवन कलर्स हैं। और आजकल तो बड़ा ट्रेंडिंग है। टीशर्ट्स पे प्रिंट करना, पोस्टर्स और ये हम सब देखते हैं। हम उनको अपनी बॉडी के अंदर जब वो विजुअलाइज कर रहे हैं, छह कलर्स दिख रहे हैं। सातवां नहीं दिख रहा। व्हिच वन रेड। कौन सा चैलेंज है? प्रोस्टेट। कहां पे
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होता है? मूलाधार में। मूलाधार मींस द लोअर एनर्जी सेंटर ऑफ आवर बॉडी। इट इज शोइंग दैट द इमंबैलेंस इज नॉट इन द फिजिकल ग्लैंड। इट इज इन द फिजिकल ग्लैंड बट दैट इमंबैलेंस इज अ सिम्टम। हम द रीज़ लाइ इन मूलाधार द रूट चक्र। उसकी
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एनर्जीज़ को बैलेंस कर 90 दिन तक उनको रेड कलर ही नहीं दिखा। 90 डेज के बाद उनको पहली बार रेड कलर दिखा। लेकिन उनकी कंसिस्टेंसी को सलाम कि वो चैलेंज जिसको डॉक्टर्स बोलते हैं कि ये लाइफ थ्रेटनिंग है। बचोगे नहीं। आज डेढ़ साल हो गया। उन्होंने ना सिर्फ फोर्थ स्टेज के उस
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चैलेंज को खत्म किया बल्कि आज अपनी हेल्दी जिंदगी बहुत बढ़िया जी रहे हैं और उनकी लाइफ का एक रूटीन है सप्तचक्र ध्यान। तो कुछ ब्रेथ वर्क और ब्रेथ वर्क के बाद हम एनर्जीस को एलिवेट करते हैं। ऊपर की तरफ लेकर के जाते हैं सप्तचक्र ध्यान के माध्यम से। हम यश की बात कर रहे थे जिसको आपने जो
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एमईएमई मीम दिया है उससे उसका 2026 वुड बी एक्सेप्शनल क्योंकि अपने आप में यह पूरी यूनिवर्सिटी थी। यह इतना पावरफुल था कि वह जो भी 2025 में था 2026 में उसका वर्जन बहुत अलग होगा। सॉफ्टवेयर अपग्रेड हो जाएगा। हार्डवेयर अपग्रेड हो जाएगा। तो
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उसने कुछ विशेस रखी हैं। कुछ इच्छाएं रखी हैं जो 2026 में वो पूरी करनी चाहता है। अब एक स्कूल ऑफ थॉट आता है यहां पे मैनिफेस्टेशन का। लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन का के उसको मैनिफेस्ट करें। उसके बारे में कुछ लोग कहते हैं विजुअलाइज करें। कुछ लोग कहते हैं लिखे कोई विज़न बोर्ड। तो डिफरेंट
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थिंकिंग प्रोसेससेस हैं। डिफरेंट स्कूल ऑफ थॉट्स हैं। मैं अनुराग भाई आपसे जानना चाहूंगा आपके अकॉर्डिंग लॉ ऑफ अट्रैक्शन और मैनिफेस्टेशन और जितने भी इसके सिनोनियम है। आपका क्या बिलीफ है? आपका क्या इसके अंदर थॉट प्रोसेस है?
या आपका सोचने का क्या सिस्टम है इसके अंदर?
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हम जो भी कुछ मैनिफेस्टेशन की जर्नी में आगे बढ़ते हैं, कुछ चाहते हैं, सबसे पहले तो ब्रेक यहीं लग जाती है। क्योंकि मैं 99% लोगों को देखता हूं कि वो सब कर रहे हैं। विज़न बोर्ड बना रहे हैं, अमेशंस कर रहे हैं, रिचुअल्स कर रहे हैं। लेकिन फिर भी एंड ऑफ द डे वो स्टक हैं।
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उसका कारण है कि हम चाहते हैं। हम चाहते हैं। चाहते हैं। यू नेवर अट्रैक्ट व्हाट यू वांट इन योर लाइफ। यू ओनली अट्रैक्ट हु यू आर। हम जो चाहते हैं वह हमें कभी नहीं मिलता।
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कभी नहीं। और सबसे बड़ी गलती यही हो रही है कि लोग चाहे जा रहे हैं। हम जो होते हैं हमें वो मिलता है। अब यहां पे एक डाउट आता है। एग्जांपल के साथ एक्सप्लेन करोगे? सो दैट मैं एक एग्जांपल से बताता हूं क्योंकि यहां पर हम इमोशंस को एक्सप्लेन करेंगे तो लोगों को समझ में आएगा ज्यादा। तो मैं
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यहां पर इसको एक्सप्लेन करता हूं कि मान लो मैं चाहता हूं जैसे ज्यादातर लोगों को मैं मिलता हूं कि मेरे पास एक Audi हो जाए मैं एक Mercedes ले लूं मैं ये मैं वो अब वो क्या कर रहा है वो ऐसा सोच रहा है कि मैं ऐसा मेरे पास एक Mercedes आ गई मैं आई
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एम रिच वो एमेशंस भी लोग लिख रहे हैं कि आई एम रिच आई एम रिच मैं विज़न बोर्ड बना रहा हूं Mercedes की फोटो उसके नीचे ये वाली फोटो उसके नीचे ये उसके नीचे सब ठीक है लेकिन यहां पे मुझे एक लकना लगता है मुझे यहां पे चैलेंज क्या लगता है कि जब मैं यह भाव कर रहा हूं कि नीचे मेरी Mercedes खड़ी खड़ी है। आपकी हुई है वैसे
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लेकिन मैं भाव कर रहा हूं कि नीचे मेरी Mercedes खड़ी हुई है। मैं जा लेकिन जैसे ही मैं बैठता हूं मैं कहता हूं Alto है। जब मैं अपने कॉन्शियस स्टेट में आता हूं तो मेरी स्टेट चेंज हो गई। मैं मेरे शरीर में कोई डिजीज है। फॉर एग्जांपल मैं कह रहा हूं आई एम कंप्लीटली हेल्दी। मेरी
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बॉडी पूरी तरह ठीक हो चुकी है। मैं मेडिटेशन से हटा। आ मैं फिर से उस स्टेट में आ गया। मैं चाह रहा हूं लेकिन मैं हुआ नहीं हूं। चाहने में और होने में क्या फर्क है? यहां
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पे लोगों को एक बड़ी ब्यूटीफुल क्ल और यह सम अप हो जाएगा इसमें। मैं इसमें थोड़ा टाइम लूंगा लेकिन सम अप हो जाएगा। अगर मान लो किसी इंसान की चाह है यश की कि वो ₹1 करोड़ कमाए। किसी की चाह है कि वो एक Mercedes ले ले। किसी की चाह है कि उसकी शादी हो जाए। किसी
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की चाह है कि वो उसकी हेल्थ ठीक हो जाए। मैं सिग्निफिकेंस चाहता हूं। मैं हैप्पीनेस चाहता हूं। मैं ब्लिस चाहता हूं। मैं फीलिंग ऑफ सिक्योरिटी चाहता हूं। सेफ्टी चाहता हूं। मेरे को यह चीजें चाहिए। निकोला टेस्ला ने एक बहुत खूबसूरत बात बोली थी। यहां से मैंने इसको डिकोड करना
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शुरू किया कि इफ यू वांट टू फाइंड आउट द सीक्रेट्स ऑफ दिस यूनिवर्स थिंक इन टर्म्स ऑफ एनर्जी, फ्रीक्वेंसी एंड वाइब्रेशन। ब्रह्मांड के रहस्यों को जानना है तो एनर्जी, फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन की शक्ल में सोचना देखना शुरू कीजिए। आवर थॉट्स,
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आवर इमोशंस एंड आवर फीलिंग्स आर प्योर वाइब्रेशनल थिंग्स। यूनिवर्स डिफरेंशिएट नहीं करता चीजों में वो सिर्फ आपके भाव को पकड़ता है। तो अगर गाड़ी पाने के बाद आपके पास यह भाव होगा कि मैं ग्रेटफुल होऊंगा। अभी ग्रेटफुल हो जाओ ना। लोग कहते हैं
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पैसा आएगा मैं खुश हो जाऊंगा। मैं कहता हूं खुश हो जाओ। पैसा अपने आप आ जाएगा। पैसा आने से खुशी आएगी यह तो कोई गारंटी नहीं है क्योंकि आपने हमने सबने जब तक पैसा नहीं आता ना यह तब तक की गलतफहमी है कि पैसा आ जाएगा तो क्योंकि वो शाहरुख खान
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बोलते हैं ना एक बात कि सब फिलॉसफर हैं लेकिन जब तक पैसा ना कमा लो तब तक फिलॉसफर की कोई नहीं कोई इज्जत नहीं है क्योंकि वहां पहुंचने के बाद तो हमें लगता है पैसा आ जाएगा यह मिल जाएगा हेल्थ उसके बाद भाव क्या आएगा वो भाव को वहां से फ्यूचर इवेंट से
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प्रेजेंट में ले आओ एक छोटी सी स्टोरी थी। इससे लास्ट में कंक्लूड करना चाहूंगा। दो बंदर एक पेड़ पर बैठे हुए थे। ऊपर से कहीं से आकाशवाणी हुई कि जो बंदर पेड़ से कूदेगा वो जंगल का राजा बन जाएगा। एक कूद गया फटाफट। दूसरा कहता है अबे पागल हो गया
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क्या? मतलब ऐसा थोड़ा होता है कि आकाशवाणी तू आर यू मैड?
आर यू नट्स और समथिंग? वो कहता है देख भाई। मुझे लगा कि आकाशवाणी हुई है। जो बंदर कूदेगा पेड़ से वो जंगल का राजा हो जाएगा। तो अपुन यह सोच के कूदा कि अगर यह आकाशवाणी सच हुई तो मैं जंगल का
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राजा हो जाऊंगा। अगर नहीं हुई तो बंदर तो वैसे भी हैं। जाए क्या? तो बंदर तो वैसे भी हैं। भाव करके देखो। आपका गया कुछ नहीं लेकिन आपको जो मिलेगा वो आपको राजा जरूर बना देगा। सिर्फ भाव में परिवर्तन है और भाव में
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परिवर्तन से मैंने अपने पार्टिसिपेंट्स में खुद में, अपने आसपास के लोगों में इतने परिवर्तन देखे हैं। मैं कहता हूं अब इसके लिए मैं एक फ्रेमवर्क देना चाहूंगा लोगों को। आपको जो भी चीज चाहिए हम उसको नोट डाउन कीजिए। नोट डाउन करने के बाद लिखिए कि इसके फुलफिल होने के बाद
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आपके क्या इमोशंस पूरे होंगे। आप हैप्पी फील करोगे, कंटेंट फील करोगे, सेफ फील करोगे, सिक्योर फील करोगे, ग्रेटट्यूड फील करोगे, आप जो फील करोगे, लव फील करोगे, कंटेंटमेंट फील करोगे। वो फीलिंग लिखो। और वो फीलिंग को आज से जीना शुरू करो। हम
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क्योंकि वो फीलिंग सिर्फ एक चीज की मोहताज नहीं है। वही खुशी स्विट्जरलैंड में भी मिल सकती है। वही खुशी आपको मां के पैरों में बैठ के भी मिल सकती है। वही हैप्पीनेस आपको कोई शराब पी के भी मिल सकती है। और वही हैप्पीनेस आप चार दोस्त बैठे हो गप्पे कर रहे हो। मजे से अपनी 20 साल पुरानी
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चीजें याद कर रहे हो। वहां पर भी मिल सकती है। आपको आनंद हो सकता है पहाड़ों में जाकर खोजने पर भी ना मिले और दो लोग आपस में बैठकर बात कर रहे हैं तो आनंद ही आनंद ऐसे लग रहा है कि यार ये क्या भाव है? कितना ब्यूटीफुल एनर्जी एक्सचेंज यहां पर भी मिल सकता है। सो इट्स नॉट अबाउट दैट थिंग। इट्स अबाउट दैट इमोशन।
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अंत में यही बचेगा। क्योंकि हमारा प्राणमय कोष और मनोमय कोष ये इमोशन साथ लेकर जाने वाला है। गाड़ी नहीं। वो हमारे लिए जरूरी है क्योंकि वह चीज मुझे प्लेजर देती है। मेरे जीवन को आसान बनाती है। लेकिन अल्टीमेटली उसको पाने के
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बाद भी वह चीज 6 महीने बाद मेरे लिए वैसी नहीं रहेगी जैसी वो पहले दिन थी। लेकिन अगर मेरा भाव सही रहा तो मैं जिंदगी में जो चाहूं वहां तक पहुंच सकता हूं। जो चाहूं उसको पा सकता हूं। दिस इज हाउ अकॉर्डिंग टू मी मैनिफेस्टेशन टू क्लेरिफाई जो सवाल इस वक्त यश के मन
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में होंगे वो मैं सवाल लेके आता हूं कि आपने एक प्रोसेस की तरह एक्सप्लेन करने की कोशिश करी कि जो चीज चाहिए स्टेप वन जो चीज चाहिए उसके बारे में सोचकर जो भाव आता है वो लिखो स्टेप टू वो भाव लिखो इट कैन बी हैप्पीनेस इट कैन बी ग्रेटट्यूड बी फीलिंग ऑफ सिक्योरिटी मैंने भाव लिख लिया
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अब मुझे वो जो मेरा गोल है उसको माइंड में रखना है उससे डिटच होना उसको रिवजिट करना है। आई वाज वेटिंग फॉर दैट क्वेश्चन क्योंकि ये ये सवाल जो है ये मैं इसका इंतजार कर रहा देखिए गीता कभी भी रची नहीं
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जा सकती थी अगर पूछने वाला अर्जुन ना होता तो एक इंसान जो कुछ भी पाना चाह रहा है मतलब एग्जांपल ले लेते हैं एक करोड़ या गाड़ी या रिलेशन ऐसी चीजें होती हैं ज्यादातर कि हेल्थ रिलेशन या वेल्थ इससे ज्यादा बाहर करियर सक्सेस ये इससे ज्यादा बाहर कुछ नहीं होता
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अब जो वो पाना चाह रहा है यहां पर मैं समझाता हूं कि अगर उसने एक टार टारगेट बना लिया सपोज कीजिए एक करोड़ जनरल एग्जाम या हेल्थ या कुछ भी एक करोड़ जब तक वो इस एक करोड़ तक नहीं पहुंचता तब तक उसके पास तीन चीजें बड़ी भयंकर
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रहेंगी सबसे पहला फियर अगर यह ना हुआ तो दूसरा उसके पास रहेगा डाउट होगा भी या नहीं भी होगा क्योंकि ज्यादातर लोग जो भी मैनिफेस्ट कर रहे हैं मैं उन सब में ये
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चीजें बड़ी कॉमन देख रहा हूं या तो डर है। अगर ना हुआ तो क्या प्रोसेस अपनाऊंगा तो इसका मतलब लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन काम नहीं करता। फिर क्या करूंगा? डर डाउट होगा या नहीं होगा?
तीसरा लैक ऑफ अबंडेंस हम कि शायद उतना हो ही ना जितना मैं सोच रहा
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हूं। तो अगर वह आउटकम पर फोकस कर रहा है, मैटर टू मैटर मैनिफेस्ट कर रहा है तो वह सबसे पहले तो डर क्योंकि मैं जो चीज चाहता हूं उसके पीछे भाव क्या है कि मेरे पास नहीं है। मेरे को गाड़ी चाहिए मान लो तो बैक ऑफ
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द माइंड मेरे पास क्या इमोशन है कि मेरे पास गाड़ी मेरे को ₹1 करोड़ चाहिए। बैक ऑफ द माइंड मेरे पास क्या है? मेरे पास एक तो मेरी प्रेजेंट स्टेट क्या है?
लैक की स्टेट। मैं किस स्टेट से मैं मैनिफेस्ट तो कार कर रहा हूं। ₹1 करोड़ कर रहा हूं। लेकिन किस स्टेट से कर रहा हूं? लैक की स्टेट से। यू
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नेवर अट्रैक्ट व्हाट यू वांट इन योर लाइफ। कार इज़ दैट वांटिंग। यू ओनली अट्रैक्ट हु यू आर एंड हु यू आर राइट नाउ? यू आर अ पर्सन हु इज इन लैक। हु इज इन फियर। हु इज इन डाउट। ये तीनों चीजें कभी समाप्त नहीं
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हो सकती अगर आप सिर्फ उस चीज पर फोकस कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही आपने ग्रेटट्यूड शुरू किया। जैसे ही आप अभी हैप्पी हो गए। सो जो आपको कल चाहिए था अगर मान लो यह यश
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है। यश को ₹1 करोड़ चाहिए। यश को अभी मिल गए तो क्या वो डाउट में है? नहीं। क्या वो फियर में है?
नहीं। क्या उसके पास कोई लैक है? नहीं। क्योंकि वो तीनों चीजें उसको अभी मिल गई। वो तीनों इमोशंस फुलफिल हो गए। अब क्या यह गाड़ी के होने से होते
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हैं? या उसके भाव के होने से होते हैं?
क्योंकि जब वह गाड़ी ले लेगा तो उसके 3 साल के बाद वह कुछ नया मैनिफेस्ट कर रहा होगा और उसके पास फिर इन तीन चीजों की कमी होगी। सो इट्स नॉट दैट कार जो आपकी जिंदगी
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में फुलफिलमेंट लेके आएगी। इट्स दोज़ इमोशंस। तो अगर मैंने उन इमोशंस को अभी जीना शुरू किया तो मेरे पास डाउट नहीं है। मेरे पास लैक नहीं है और मेरे पास कोई डर नहीं है क्योंकि मैं अभी आनंद में हूं। कनेक्टिंग
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बैक टू द फर्स्ट स्टेटमेंट आई कोटेड शंकर भगवान की कि उसे सदा ही डर रहता है जो ऊंचा चढ़ जाएगा जो बैठा है धरती पर उसे नीचे कौन गिराए इट्स नॉट अबाउट कि गाड़ी पर बैठने वाला ऊपर हो गया दूसरा धरती पर नहीं उसने कहा कि मेरे पास भाव मैं अगर
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लंका में जाकर बैठूंगा तो भी मैं वही इंसान हूं। मैं मृग छाल बिछा के इस पर्वत के ऊपर बैठता हूं। मैं तो भी वही इंसान हूं। तो यह मेरे से छीन गई तो मुझे डर नहीं है। वो इंसान जो गाड़ी पाना चाह रहा है जब उसने वो तीनों भाव पा लिए तो वह कह
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रहा है मिले ना मिले बाद की बात है। मैं तो पहले ही संतुष्ट हूं। और जो जैसा है जो एनर्जीस जैसी हैं उसको वैसा ही दिया जाएगा। दिस इज द फर्स्ट रूल ऑफ क्वांटम फिजिक्स। लाइक अट्रैक्ट्स लाइक इसी पर बेस्ड है। पार्टिकल्स जो नॉन डलिटी में
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नॉन एटेंगल्ड से एटेंगल्ड हो जाते हैं। क्वांटम फिजिक्स जब मैंने पढ़ा तो पता चला वो यही स्टेट करता है। तो इसका मतलब वो चीज मुझे फुलफिलमेंट नहीं देगी। मुझे जैसे गर्मी बहुत ज्यादा है। बाहर आप बाहर से आए। मैंने आपको एक गिलास पानी ऑफर किया।
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आपने पानी पिया आनंद आएगा। यस। गर्मी से आए पानी ऑफर किया। पानी पिया एक गिलास। आनंद आएगा। दूसरा गिलास दिया। आनंद आएगा आएगा थोड़ा सा। तीसरा दिया। चौथा दिया। अब मैं कहूं यह छठा गिलास पी।
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पानी में आनंद नहीं था। होता तो छठे गिलास में भी आता। आनंद उस प्यास की तृप्ति में था। प्यास बुझ जाने में आनंद था। पानी में नहीं। गाड़ी आएगी तो प्यास क्या बुझेगी? मैं
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हैप्पी होऊंगा। मैं सिक्योर होऊंगा और मैं ग्रेटफुल होऊंगा। तो अगर वो प्यास अभी बुझ गई आपकी तो फिर आप डर में नहीं हो। आप लैक में नहीं हो। आप घबराहट में नहीं हो। आप डाउट में नहीं हो। यू विल मैनिफेस्ट हु यू
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आर। हु यू आर अ हैप्पी। अ सेटिस्फाइड पर्सन। सिक्योर पर्सन एंड अ ग्रेटफुल पर्सन। एंड फ्रॉम वेयर यू आर एक्सपेक्टिंग मैनिफेस्टिंग राइट नाउ फ्रॉम दिस स्टेट। हैप्पीनेस, ग्रेटट्यूड एंड
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सिक्योर। यू आर नॉट मैनिफेस्टिंग अब फ्रॉम द स्टेट ऑफ़ लैक, फ्रॉम द स्टेट ऑफ़ फियर एंड फ्रॉम द स्टेट ऑफ़ डाउट। पहले जब मैं सिर्फ मैटर के बारे में सोच रहा था, गाड़ी गाड़ी गाड़ी गाड़ी, तो मैं कहां से मैनिफे, अरे यार नहीं हुआ तो क्या होगा? 369 फार्मूला लगाऊं, सर। सर, एफेशन लिखूं, सर।
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सर, ये मैं डाउट में हूं। मुझे क्लेरिफाई करो। मैं क्या लगाऊं, सर? क्योंकि मुझे लगाने में इंटरेस्ट नहीं है। मुझे पाने में इंटरेस्ट है। मैं अभी आनंदित हूं। जो करते हो करो यार मेरी तो प्यास बुझी हुई है। दिस इज हाउ इट वर्क्स। तो वो जो पाना
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चाह रहा है उसको सिर्फ वो भाव लिखेगा और उन भाव को एक्सपीरियंस करने लगेगा आज से तो वो देखेगा वो जो फियर था, वो जो डाउट था और वो जो लैक था ये तीनों डिसअपीयर होने शुरू हो जाएंगे। किसी ने मुझसे मैंने किसी से पूछा कि अंधेरा एक कमरे में बहुत
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ज्यादा है तो क्या करना पड़ेगा? अगर अंधेरे को भगाना है। वो बोला लाइट जलानी पड़ेगी। मैंने कहा नहीं अंधेरे को भगाओ। तो सर लाइट जलानी पड़ेगी। नहीं नहीं नहीं अंधेरे को भगाना है तो सर भगा नहीं सकते।
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लाइट ही जलानी पड़े। दिस इज़ हाउ इट वर्क्स। मैं लैक को खत्म करने पे फोकस करूं तो मेरी पूरी एनर्जी लैक में जा रही है। मैं सारा दिन यही सो लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन में गलती क्या कर रहे हैं? कि मैं लैक नहीं मैं अबंडेंट फील कर रहा हूं। आई एम हैप्पी। आई एम हेल्दी। आई हैव ₹1 करोड़।
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मैं जब मैं उसको एनर्जी दे रहा हूं, तो एक्चुअल में मैं लैक को ही तो एनर्जी दे रहा हूं। कि मैं लैक को खत्म करूं। मैं अपनी बॉडी को यह फील करवाऊं दैट आई एम नॉट लिविंग इन लैक। बट अल्टीमेटली आई एम लिविंग इन लैक। दैट्स व्हाई आई एम नॉट एबल टू मैनिफेस्ट। तो इसलिए मुझे एनर्जी किसको देनी है?
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हैप्पीनेस को, ग्रेटट्यूड को, सिक्योरिटी को, सेफ्टी को। तो मेरा भाव बदलेगा और भाव ही भगवान है। भगवान को मांगने से मांगते हम हम मांगने से कुछ नहीं मिलता जी। वह कहता है जो हो वही दिया जाएगा क्योंकि
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भगवान खुद कर्म नहीं बदल सकते और यह एक धर्म नहीं यह हर धर्म बोल रहा है श्री कृष्ण जब अपने जीवन की आखिरी समय में थे जब वो मानव रूप लेकर यहां पे आए आखिरी समय में थे उनकी मृत्यु हुई किसने की एक भील ने उनके पांव में मणि थी उसने मणि को समझा
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कि हिरण की आंख है उस भील ने तीर चलाया श्री कृष्ण के पांव में लगा और श्री कृष्ण मरे इस संसार से अपने शरीर को त्याग करके गए वो आया वो बोला कि मेरे से देखा उसने कहा हिरण नहीं भगवान हो आप आप तो मेरे से गलती हो गई। बोले, गलती नहीं हुई। पिछले जन्म में तू बाली था।
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और मैं राम था और मैंने पेड़ के पीछे छुप करके तेरे ऊपर वार किया था। आज तूने वही करना था मेरे साथ और मेरे साथ यह होना था। भगवान अपना कर्म खुद नहीं बदल पा रहे। वो कह रहे हैं ये भोगना पड़ेगा। आप कैसे बदल रहे हो? एक ही चीज से भाव से। क्योंकि
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मांगने से भगवान भी मांगे कि मेरी मृत्यु ना हो तो ये मानव शरीर के लिए पॉसिबल नहीं है। भाव बदलना पड़ेगा। सिर्फ भाव बदलते हैं। तो आप यहां पर खुद देखेंगे कि यह लोग मैं यह नहीं चाहूंगा इनसे किसी से भी जो पॉडकास्ट देख रहा है कि आप यहां अभी कमेंट
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करें। मैं कहूंगा जो चीजें अगर आप यह फ्रेमवर्क यूज करते हो जो चाहते हो वो देख लो। उसके पीछे का भाव आज से जीना शुरू करो। लोग यहां 10 दिन बाद आएंगे। महीने बाद आएंगे इस वीडियो पे। 2 महीने बाद 6 महीने बाद वापस आएंगे कोई। और वो कमेंट कर रहे होंगे। यह मतलब यह स्टेटमेंट आप निकाल
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सकते हो यहां से स्पेसिफिकली। वह कमेंट कर रहे होंगे कि सर मैंने भाव बदला मेरा जीवन क्योंकि इन दैट केस वी आर नॉट मैनिफेस्टिंग फ्रॉम मैटर टू मैटर व्हिच इज नॉट पॉसिबल इन क्वांटम वर्ल्ड फ्रॉम एनर्जी टू एनर्जी फ्रॉम भाव टू भाव क्योंकि आज भाव पैदा करूंगा तो भाव ही
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फुलफिल होगा और कुछ नहीं। तो दिस इज हाउ अकॉर्डिंग टू मी। इस सब प्रोसेस मेंटल मूवी टेक्निक का क्या रोल रह सकता है? देखिए अगर मैं इस पूरे प्रोसेस की बात करूं तो मेंटल मूवी टेक्निक इज द किंग
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टेक्निक इन दिस प्रोसेस। क्योंकि अभी जो मैंने बोला कि फ्यूचर इवेंट को प्रेजेंट में कोलैप्स करना है, यह मेंटल मूवी टेक्निक के थ्रू ही पॉसिबल है। जिसको हम साधारण भाषा में विजुअलाइजेशन बोल रहे हैं। मेंटल मूवी का मतलब है कि अपने माइंड में अपने फ्यूचर इवेंट की एक मूवी बनाना।
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हम और उस मूवी को प्रेजेंट में देखना। मान लो मैं कोई मूवी देख रहा हूं। अब मूवी में कोई एक मूवी थी यार उसमें शाहरुख खान मर जाता है। नहीं कौन सी थी? राम जाने। कोई ऐसी कोई मुझे ध्यान नहीं। कोई मूवी थी। मैं देख रहा हूं सब रो रहे हैं। इधर यह भी दो लेडीज बैठी रो रही हैं।
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वो भी सब अरे भाई वो मतलब वो शाहरुख खान है। वो स्क्रीन पे है। लेकिन हमारा माइंड जब उसको इमेजिनेशन जब वो कोई भी मूवी देखता है तो उसको लगता है दिस इज रियल दिस इज हैपनिंग इन फ्रंट ऑफ मी। और आप थोड़ी देर के लिए मतलब ये जितने यंग जवान लड़के
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बैठे हैं ये जब वो देखते हैं ना सयारा तो इनको लगता है कि ये अपुनी है लिटरली क्योंकि आपका माइंड बिलीव ही नहीं करता कि ये कोई मूवी चल रही है तो वो जो फ्यूचर इवेंट है उसकी मूवी आपका फ्यूचर कैसा हो आपका फ्यूचर कैसा हो उसकी एक मूवी बनाओ
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कि फ्यूचर में मैं इतना हैप्पी हूं मैं ऐसे जा रहा हूं मैं लोगों की हेल्प कर रहा हूं मैं यह गाड़ी है मैं यह घर है मैं ऐसा हूं वो जो भी चीजें हैं उसको क्रिएट करो। क्रिएट करने के बाद उसको देखो प्रेजेंट में कि वो फ्यूचर को मैंने ड्रॉ कर लिया अभी। क्लोज योर आइज और अपने माइंड को यह
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बताओ क्योंकि वो इमेजिनेशन और रियलिटी में फर्क नहीं करता कि फ्यूचर फ्यूचर में नहीं है। फ्यूचर प्रेजेंट में है और मैं उसको अभी जी रहा हूं। तो मेंटल मूवी अगर आप क्रिएट अपनी मेंटल मूवी हर इंसान बना सकता है। वो मेंटल मूवी जो वो भविष्य में देखना चाहता है अपने साथ होता हुआ। उसको प्रेजेंट में देखे तो ये विजुअलाइजेशन
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सबसे ब्यूटीफुल आस्पेक्ट हो जाएगा उसकी जिंदगी का। और ये जो चीजें उसकी जिंदगी में देगा फुलफिलमेंट अचीवमेंट अकम्प्लिशमेंट्स हैप्पीनेस जॉय ब्लिसफुलनेस वो उसके जीवन की करंट स्टेट को बदलेगी एंड वी नेवर अट्रैक्ट बट वी वांट इन आवर लाइफ वी ओनली अट्रैक्ट हु वी आर और अगर करंट स्टेट बदली तो आई एम
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अट्रैक्टिंग आई मैनिफेस्टिंग फ्रॉम दैट करंट स्टेट व्हिच इज एलिवेटेड जो भीड़ से जैम से ऊपर है जो सब देख पा रही है कि व्हिच इज गुड व्हाट इज गुड एंड व्हाट इज़ बैड फॉर मी। और यह मूवी जब यश देखे तो सिमिलर मूवी एवरीडे
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एक बार स्क्रिप्ट कर ले अच्छे से उसकी इमोशंस को अच्छे से फील कर ले उसके विजुअल्स को अच्छे से फील कर ले कि जो मूवी चल रही है चलने दे बहुतेंट क्वेश्चन है इस मेंटल मूवी में भी बहुत जरूरी है उसका भाव हम
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अगर क्योंकि कुछ लोगों के साथ यह होता है कि वो सेम मूवी देख के मोनोटोनस हो जाते हैं और फिर उनको वही जैसे एक कार जो नई-नई आई वो जो इमोशन दे रही है। वो 6 महीने बाद वो इमोशन नहीं दे रही है। तो अगर वो मूवी उसको वही ट्रिगर वही रश दे रही है
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तो मूवी इज नॉटेंट दैट भाव इजेंट बट इफ दैट भाव इज मिसिंग तो उसमें थोड़ा स्पाइस थोड़ा तड़का थोड़ा बिग बॉस का वो क्या होता है वो थोड़ा है ना कुछ बढ़िया उसको और बनाओ स्क्रिप्ट नहीं लिखो बागी एक बनाओ बागी टू बनाओ बागी थ्री बनाओ बागी 10 बनाते जाओ और गोलमाल 50 तक बनाते जाओ इज
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दैट भाव इफ यू आर एबल टू फील इफ यू आर एबल टू बी इन दैट भाव बी इन दैट भाव तो सही चल रही हो तो सही चल रही है मूवी लेकिन अगर आपको लगे कि मैं अब उतना रश मेरे को वो भाव नहीं आ रहा क्योंकि असली में भी वो गाड़ी आ जाएगी 6 महीने बाद वो भाव नहीं आएगा आई एम लिटरली टेलिंग यू
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लिटरली है सबने ये किया है कोई चीज जो एस्पिरेशन थी कोई मोबाइल ही हो लेना है लेना है लेना है जब ले लिया 10 मिनट बाद उसी मोबाइल पे अगर कॉल आ गई कोई वो 10 मिनट में भाव खत्म हो जाता है 10 मिनट में भाव खत्म हो जाता है तो व्हाट इज इंपॉर्टेंट दैट भाव इफ यू आर एबल टू मेंटेन तो दैट इज डूइंग
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गुड फॉर यू इफ यू यू नॉट एबल टू मेंटेन तो वो मैकेनिकल हो गया फिर यू नीड नीड टू चेंज दैट सिचुएशन कि अब मैं इससे और जैसे हम अगर जैसे आपने स्टार्टिंग में नशा वर्ड का प्रयोग किया था तो अगर हम इसको उसमें भी देखें तो वो पीने वाले को पहले दो पैग में वो सेट हो जाता है।
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फिर वो मतलब वो चार में भी उसको लगता है सिगरेट पीने वाला भी ऐसे ही करता है। वो एक कश में उसको लगता है फिर वो पैकेट पैकेट निकाल रहा है। क्योंकि अब वही डोपामिन उसको वही भाव उसको लेकिन अगर वह आपको भाव दे रहा है, तो मतलब मेरा मूवी की कंसिस्टेंसी या उसको चेंज करने पे बिल्कुल
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फोकस नहीं है। मेरा फोकस है भाव को मेंटेन रखने पे। तो अगर किसी ने वो किया तो अमेजिंग रिजल्ट्स मिल। आखिरी क्वेश्चन मैं यश के बिहाफ पे नहीं पूछ रहा। अपने बिहाफ पे पूछ रहा हूं। सो हिमेश के बिहाफ पे एनी थ्री बुक्स यू वुड सजेस्ट। हां मैं सबसे पहले तो बिकमिंग
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सुपर नेचुरल डॉक्टर जो डिस्पेंजा की एक बुक है। मैं कहता हूं ये स्कूल के सिलेबस में होनी चाहिए। स्कूल के सिलेबस में यू कैन हील योर लाइफ। लुई ने लिखी ये बुक। लोगों को लगता है कि ये बुक सिर्फ अपने बॉडी के फिजिकल क्योंकि उनको कैंसर था। उन्होंने खुद से इसको हील
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किया तो इट्स ऑल अबाउट कि आप नहीं। इट्स अबाउट हीलिंग दोज़ इमोशंस व्हिच आर स्टक इन योर बॉडी। बिकॉज़ बॉडी कीप्स द स्कोर। वो इमोशंस आप हील करते हो तो आप सिर्फ अपनी फिजिकल हेल्थ को नहीं मेंटल हेल्थ को, फाइनेंसियल हेल्थ को, स्पिरिचुअल हेल्थ को, सोशल हेल्थ को, रिलेशनशिप की सब
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चीजों को क्योर करते हो। सो यू कैन हील योर लाइफ बाय लुई। और तीसरी बुक यह जो सबसे इंपॉर्टेंट थी जिसने मेरी जिंदगी को बदलने में एक सबसे बड़ा योगदान दिया। यह डॉक्टर जो डिस्पेंजा की एक बुक थी प्लेसीबो। यू आर द प्लेसीबो कि हाउ प्लेसीबो वर्क्स।
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प्लेसीबो इज अ मेंटल फिनोमिना। आपका माइंड कैसे चीजों को प्रसीव करके सिर्फ सच मानने लगता है। और अगर आपका माइंड यह माने कि मेरे को कोई बीमारी हो रही है। मेरे को कोई बीमार दिस दिस इज अ डिजीज। यू नो मेरे को ये था। इसको बोला जाता है हाइपोकांड्रिया।
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हाइपोकांड्रिया में क्या होता है? एक इंसान ये सोचता है कि यार जब वो देखता है ना इसको कैंसर हो गया। वो कहता है मुझे तो नहीं हो रहा। मेरे को तो नहीं। वो किसी का हार्ट अटैक सुनता है। उसको लगता है यार मुझे भी हार्ट अटैक आने वाला है। मेरे को डॉक्टर के पास लेके चलो। मेरा पर्स बड़ा तेज। दिस इज़ हाइप मुझे था ये हाइपोकांड्रिया। मैं किसी का हार्ट अटैक
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सुनता था और मैं बोलता था कि हॉस्पिटल ले चलो क्योंकि मुझे भी हार्ट अटैक आने वाला है और ऐसा बोला जाता है कि जो व्यक्ति हाइपोकंड्रिक स्टेट में लंबा रहता है वो उस डिजीज को मैनिफेस्ट कर लेता है बॉडी में क्योंकि डिजीज तो एक अलग चीज है दिखते उसके सिम्टम्स हैं और वो सिम्टम्स अभी अपनी बॉडी को दिखा रहा है राइट नाउ और वो
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सिम्टम्स सारे के सारे बॉडी में आने पर तो यह प्लेसीबो को पढ़ के पता चलता है कि हाउ प्लेसीबो एंड नोसीबो वर्क्स अगर मैं यह सोचूं कि मुझे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ दवाई दी जा रही है और मैं इससे ठीक हो जाऊंगा। अगर मेरा बिलीफ है तो मैं ठीक हो जाऊंगा। अगर इसीलिए लोगों
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को कोई मंदिर जाकर मत्थ टेक के ठीक हो जा रहा है। वो शक्ति है लेकिन आपका बिलीफ काम करता है। और ये प्लिसबो पढ़ के समझ में आता है कि प्लेसीबो इज रियल यस। आपका भाव मूर्ति को भगवान बनाता है। जब उसमें प्राण प्रतिष्ठा होती है। प्राण
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प्रतिष्ठा नहीं है तो वो किसी के लिए मूर्ति है। किसी के लिए बेचने की वस्तु किसी के लिए घड़ने की चीज है। आपके घर में आती है। आप मंदिर में जाते हैं। ऐसा करते हैं भाव बदल जाता है। क्योंकि भाव ही मंदिर को मंदिर बनाता है। अगर वही भाव घर में ले आओ तो घर भी मंदिर है। और वही भाव
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मंदिर में ना हो तो मंदिर भी मंदिर नहीं है। जी। तो इसलिए भाव ही भगवान है। मैं इस चीज में विश्वास करता हूं और मुझे लगता है लोग यह समझ जाए तो यह जीवन को अद्भुत तरीके से बदल सकता है। आई होप कि इस पडकास्ट में बताए हर एक स्टेप से आपको सेल्फ रिफ्लेक्शन हुई होगी। आपको कई
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करेक्शंस नजर आई होंगी और आगे के लिए कई एक्शंस नजर आए होंगे। और किन टॉपिक्स पर आप पॉडकास्ट चाहते हैं और किन गेस्ट को आप इस पडकास्ट में देखना चाहते हैं मुझे नीचे कमेंट्स में जरूर बताना। फिर मिलेंगे अगली वीडियो में। तब तक खुश रहिए, खुशियां बांटते रहिए। आई लव यू ऑल।